केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 10वीं और 12वीं के लाखों छात्रों को बड़ी राहत दी है। बोर्ड ने मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एक नई व्यवस्था शुरू की है। अब यदि किसी छात्र ने अपने अंकों के वेरिफिकेशन के लिए आवेदन किया है और जांच के बाद भी उसके नंबरों में कोई बदलाव नहीं होता है, तब भी वह अपनी जांची गई आंसर शीट देख सकेगा।

पहले क्या होता था?
अब तक की व्यवस्था में यदि किसी छात्र ने मार्क्स वेरिफिकेशन या री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन किया और परिणाम “नो-चेंज” आया, तो उसे अंतिम माना जाता था। छात्र अपनी उत्तर पुस्तिका को दोबारा नहीं देख सकते थे। ऐसे में कई छात्रों के मन में यह सवाल बना रहता था कि उनकी कॉपी की जांच सही तरीके से हुई है या नहीं।
अब क्या बदलेगा?
सीबीएसई के नए फैसले के तहत ऐसे छात्र, जिनके अंकों में कोई बदलाव नहीं हुआ है, वे संबंधित सीबीएसई रीजनल ऑफिस में जाकर अपनी जांची गई उत्तर पुस्तिका देख सकेंगे। इससे छात्रों को यह समझने का मौका मिलेगा कि उन्हें किन उत्तरों पर कितने अंक दिए गए और कहां अंक कटे हैं।
पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम
बोर्ड का मानना है कि इस नई सुविधा से छात्रों के मन में परीक्षा परिणाम को लेकर उठने वाले सवाल कम होंगे। साथ ही मूल्यांकन प्रक्रिया पर उनका भरोसा भी बढ़ेगा। यह कदम छात्रों और अभिभावकों के बीच पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
री-इवैल्यूएशन के नतीजे भी जारी
सीबीएसई ने कक्षा 12वीं के मार्क्स वेरिफिकेशन, आंसर शीट की फोटोकॉपी और री-इवैल्यूएशन के लिए किए गए आवेदनों के परिणाम जारी करने शुरू कर दिए हैं। बोर्ड अधिकारियों के मुताबिक, करीब 87 प्रतिशत छात्रों के नतीजे आधिकारिक पोर्टल पर अपलोड किए जा चुके हैं। बाकी छात्रों के परिणाम भी जल्द जारी किए जाएंगे।
छात्रों के लिए सलाह
सीबीएसई ने छात्रों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी पर ही भरोसा करें। किसी भी अफवाह या अपुष्ट जानकारी से बचें और समय-समय पर बोर्ड की वेबसाइट पर अपडेट देखते रहें।
सीबीएसई का यह फैसला उन छात्रों के लिए राहत की खबर है जो अपने परिणामों को लेकर असमंजस में थे। नई व्यवस्था न केवल छात्रों को संतुष्टि देगी, बल्कि परीक्षा प्रणाली को और अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने में भी मदद करेगी।




