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क्या ऊर्जा संकट टल गया? केंद्र ने क्यों हटाया प्राकृतिक गैस पर लगा कंट्रोल?

क्या ऊर्जा संकट टल गया? केंद्र ने क्यों हटाया प्राकृतिक गैस पर लगा कंट्रोल?

नई दिल्ली।

केंद्र सरकार ने देश की ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक गतिविधियों को राहत देते हुए प्राकृतिक गैस की आपूर्ति पर लगाए गए आपातकालीन प्रतिबंधों को वापस ले लिया है। सरकार का यह फैसला शनिवार को सामने आया। इसके साथ ही अब उर्वरक कारखानों, तेल रिफाइनरियों, सिटी गैस वितरण कंपनियों और औद्योगिक उपभोक्ताओं को पहले की तरह सामान्य मात्रा में प्राकृतिक गैस की आपूर्ति की जाएगी।

सरकार का मानना है कि पश्चिम एशिया में संघर्ष कम होने और युद्धविराम लागू होने के बाद तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की आपूर्ति को लेकर पैदा हुई आशंकाएं काफी हद तक खत्म हो गई हैं। ऐसे में अब ऊर्जा क्षेत्र में लागू की गई अस्थायी पाबंदियों की जरूरत नहीं रह गई है।

दरअसल, मार्च महीने में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता का माहौल बन गया था। उस समय सबसे बड़ी चिंता यह थी कि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य से एलएनजी और कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। यदि इस मार्ग से आपूर्ति बाधित होती, तो देश में प्राकृतिक गैस और ईंधन की उपलब्धता पर सीधा असर पड़ सकता था। इसी संभावना को देखते हुए केंद्र सरकार
ने एहतियात के तौर पर प्राकृतिक गैस की आपूर्ति पर आपातकालीन नियंत्रण लागू किया था।

इन प्रतिबंधों के तहत उपलब्ध गैस का प्राथमिक उपयोग आवश्यक क्षेत्रों के लिए सुनिश्चित किया गया था। कई औद्योगिक इकाइयों को सीमित मात्रा में गैस उपलब्ध कराई जा रही थी ताकि घरेलू जरूरतों और जरूरी सेवाओं पर किसी तरह का असर न पड़े। सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए थी और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम के अनुसार फैसले ले रही थी।

अब पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और युद्धविराम लागू होने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर स्थिति पहले की तुलना में स्थिर हुई है। एलएनजी के जहाजों की आवाजाही सामान्य होने लगी है और आपूर्ति बाधित होने का खतरा काफी कम हो गया है। इसी को देखते हुए केंद्र सरकार ने आपातकालीन प्रतिबंध हटाने का निर्णय लिया है।

सरकार के इस फैसले से सबसे अधिक राहत उर्वरक उद्योग को मिलने की उम्मीद है। प्राकृतिक गैस यूरिया सहित कई उर्वरकों के उत्पादन में प्रमुख कच्चा माल होती है। सामान्य गैस आपूर्ति बहाल होने से उर्वरक उत्पादन में तेजी आएगी और किसानों के लिए खाद की उपलब्धता बेहतर बनी रहेगी। आने वाले कृषि सीजन में इसका सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है।

तेल रिफाइनरियों को भी इस फैसले से लाभ मिलेगा। सामान्य गैस आपूर्ति मिलने से उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता बनाए रखने में आसानी होगी। इसके अलावा सिटी गैस वितरण कंपनियां भी अब घरेलू उपभोक्ताओं, सीएनजी वाहनों और छोटे व्यवसायों को पहले की तरह निर्बाध गैस आपूर्ति कर सकेंगी। औद्योगिक क्षेत्र को भी राहत मिलेगी |

क्योंकि कई उद्योग उत्पादन प्रक्रियाओं में प्राकृतिक गैस का उपयोग करते हैं। सामान्य आपूर्ति बहाल होने से उत्पादन लागत और संचालन पर सकारात्मक प्रभाव पड़नेकी संभावना है।

पिछले दस दिनों के दौरान केंद्र सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए कई अन्य महत्वपूर्ण फैसले भी लिए हैं।
सरकार ने वाणिज्यिक एलपीजी की आपूर्ति को फिर से पहले के स्तर पर पहुंचा दिया है। इसके अलावा खुदरा पेट्रोल पंपों से व्यावसायिक उपभोक्ताओं को पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंध भी हटा दिए गए हैं। पहले सुरक्षा के मद्देनजर कुछ सीमाएं तय की गई थीं, लेकिन अब उन्हें समाप्त कर दिया गया है।

सरकार ने डीजल की खरीद पर लागू 200 लीटर की अधिकतम सीमा भी हटा दी है। इससे परिवहन, निर्माण और औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़े व्यवसायों को बड़ी राहत मिलेगी। साथ ही वाणिज्यिक एलपीजी और विमान ईंधन (एटीएफ) की कीमतों में भी कमी की गई है, जिससे होटल, रेस्तरां, एयरलाइंस और अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों को आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार के इन फैसलों से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि देश की ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था धीरे-धीरे सामान्य हो रही है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिरता लौटने के साथ भारत ने भी अपनी आपातकालीन रणनीति को चरणबद्ध तरीके से वापस लेना शुरू कर दिया है। इससे उद्योगों का विश्वास बढ़ेगा और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी।

हालांकि सरकार अभी भी वैश्विक हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है। ऊर्जा मंत्रालय और संबंधित एजेंसियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलावों की निगरानी कर रही हैं ताकि भविष्य में किसी भी संभावित संकट का समय रहते सामना किया जा सके। यदि दोबारा किसी प्रकार की आपूर्ति बाधित होने की आशंका उत्पन्न होती है, तो आवश्यक कदम उठाने की तैयारी भी रखी गई है।

भारत दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों में शामिल है। इसलिए पश्चिम एशिया जैसे क्षेत्रों में होने वाले भू-राजनीतिक घटनाक्रम का सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ता है। ऐसे में सरकार की प्राथमिकता हमेशा यह रहती है कि आम नागरिकों, किसानों, उद्योगों और परिवहन क्षेत्र को आवश्यक ईंधन और ऊर्जा की निर्बाध आपूर्ति मिलती रहे।

कुल मिलाकर, प्राकृतिक गैस आपूर्ति पर लगे आपातकालीन प्रतिबंधों को हटाने का केंद्र सरकार का फैसला देश की ऊर्जा व्यवस्था के सामान्य होने का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।इससे उद्योगों को राहत मिलेगी, उत्पादन गतिविधियां तेज होंगी, उर्वरक क्षेत्र को मजबूती मिलेगी और आम उपभोक्ताओं तक ऊर्जा की उपलब्धता पहले की तरह बनी रहेगी। सरकार के हालिया कदम यह भी दर्शाते हैं कि भारत वैश्विक चुनौतियों के बीच अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाए रखने और परिस्थितियों के अनुसार त्वरित निर्णय लेने में सक्षम है।

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