आध्यात्म

अमरनाथ यात्रा 2026: तीन दिन में 56 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने किए दर्शन, हिम शिवलिंग की ऊंचाई घटकर करीब एक फीट

अमरनाथ यात्रा 2026: तीन दिन में 56 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने किए दर्शन, हिम शिवलिंग की ऊंचाई घटकर करीब एक फीट

जम्मू-कश्मीर में शुरू हुई पवित्र अमरनाथ यात्रा 2026 में श्रद्धालुओं की आस्था पहले से कहीं अधिक देखने को मिल रही है। 3 जुलाई से शुरू हुई इस साल की यात्रा के पहले तीन दिनों में ही 56 हजार से अधिक श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं। देश के अलग-अलग राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा अमरनाथ के दर्शन के लिए लगातार पहुंच रहे हैं। यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं का उत्साह और भक्ति का माहौल साफ दिखाई दे रहा है।

इसी बीच अमरनाथ गुफा से एक महत्वपूर्ण जानकारी भी सामने आई है। प्राकृतिक रूप से बनने वाले हिम शिवलिंग का आकार तेजी से छोटा हुआ है। रिपोर्टों के अनुसार, शिवलिंग की ऊंचाई अब घटकर करीब एक फीट रह गई है। हर साल मौसम और तापमान के अनुसार हिम शिवलिंग का आकार बदलता है। इसके बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं आई है और बड़ी संख्या में लोग बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।

तीन दिन में 56 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

यात्रा के पहले दिन से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। पहले दो दिनों में 32,313 श्रद्धालुओं ने पवित्र गुफा में दर्शन किए थे। वहीं यात्रा के तीसरे दिन रविवार को 24,648 श्रद्धालुओं ने बाबा बर्फानी के दर्शन किए। इस तरह तीन दिनों में कुल 56,961 श्रद्धालु पवित्र गुफा पहुंच चुके हैं।

यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 18 प्रतिशत अधिक बताई जा रही है। इससे स्पष्ट है कि इस बार अमरनाथ यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में पहले से अधिक उत्साह है।

3880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है पवित्र गुफा

अमरनाथ की पवित्र गुफा समुद्र तल से लगभग 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां प्राकृतिक रूप से बर्फ से बनने वाले शिवलिंग के दर्शन के लिए हर वर्ष लाखों श्रद्धालु कठिन पहाड़ी रास्तों को पार कर पहुंचते हैं। इसे भगवान शिव के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक माना जाता है।

रविवार को मौसम आंशिक रूप से बादलों से घिरा रहा, लेकिन पूरे दिन यात्रा बिना किसी बड़ी बाधा के जारी रही। दर्शन करने के बाद श्रद्धालु सुरक्षित अपने-अपने शिविरों में लौट गए।

हिम शिवलिंग का आकार हुआ छोटा

इस वर्ष अमरनाथ यात्रा के दौरान सबसे अधिक चर्चा प्राकृतिक हिम शिवलिंग को लेकर हो रही है। रिपोर्टों के अनुसार, शिवलिंग की ऊंचाई घटकर करीब एक फीट रह गई है। मौसम में बदलाव और तापमान बढ़ने के कारण हर वर्ष हिम शिवलिंग के आकार में परिवर्तन होता है। विशेषज्ञ भी इसे प्राकृतिक प्रक्रिया मानते हैं।

हालांकि, श्रद्धालुओं के लिए बाबा बर्फानी का दर्शन ही सबसे बड़ी आस्था है। शिवलिंग के आकार में बदलाव के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह और श्रद्धा पहले की तरह बनी हुई है।

दो मार्गों से हो रही है यात्रा

अमरनाथ यात्रा इस वर्ष भी दो प्रमुख मार्गों से संचालित की जा रही है। पहला पारंपरिक 48 किलोमीटर लंबा पहलगाम मार्ग है, जबकि दूसरा 14 किलोमीटर लंबा बालटाल मार्ग है।

पहलगाम मार्ग अपेक्षाकृत लंबा है लेकिन धार्मिक दृष्टि से अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। वहीं बालटाल मार्ग छोटा है, जिससे कई श्रद्धालु कम समय में यात्रा पूरी कर लेते हैं।

दोनों मार्गों पर सुरक्षा, चिकित्सा और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है।

पंजीकरण स्लॉट हुए फुल

श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड संख्या को देखते हुए प्रशासन ने जानकारी दी है कि 9 जुलाई तक के सभी पंजीकरण स्लॉट पहले ही बुक हो चुके हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में अपंजीकृत श्रद्धालु जम्मू पहुंच रहे हैं।

प्रशासन ने अपील की है कि जिन श्रद्धालुओं का पंजीकरण नहीं हुआ है, वे फिलहाल यात्रा स्थगित करें और नया स्लॉट मिलने के बाद ही यात्रा पर निकलें।

केवल पंजीकृत श्रद्धालुओं को मिलेगी अनुमति

भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने रविवार से नया नियम लागू किया है। अब केवल उन्हीं श्रद्धालुओं को कश्मीर की ओर जाने की अनुमति दी जा रही है, जिनका पंजीकरण पहले से हो चुका है।

अपंजीकृत श्रद्धालुओं को निर्धारित चौकियों पर रोककर अगले उपलब्ध पंजीकरण की प्रतीक्षा करने को कहा जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय यात्रियों की सुरक्षा और यात्रा को व्यवस्थित बनाए रखने के लिए लिया गया है।

जम्मू में भी उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

जम्मू शहर में भी बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी जा रही है। तवी नदी के किनारे बने पंजीकरण केंद्रों, राम मंदिर, पुरानी मंडी और गीता भवन में सुबह से देर शाम तक लंबी कतारें लगी रहीं।

सोमवार को भी हजारों श्रद्धालु पंजीकरण कराने पहुंचे। जानकारी के अनुसार, अलग-अलग तिथियों के लिए लगभग 5,000 नए यात्रियों का पंजीकरण किया गया।

स्वास्थ्य विभाग ने किए विशेष इंतजाम

यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने व्यापक तैयारियां की हैं। रामबन के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. कमल जी जादू ने बताया कि पूरे यात्रा मार्ग पर 16 मेडिकल टीमें तैनात की गई हैं।

चंदरकोट यात्री निवास और लैंबर यात्रा कैंप में मिनी अस्पताल बनाए गए हैं, जहां चार-चार बेड, ईसीजी मशीन, कार्डियक मॉनिटर, ऑक्सीजन, नेबुलाइज़र और अन्य जरूरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं।

इन अस्पतालों में चौबीसों घंटे डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ मौजूद रहते हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में श्रद्धालुओं को तुरंत इलाज मिल सके।

75 सदस्यीय मेडिकल टीम रहेगी तैनात

पूरी यात्रा के दौरान करीब 75 सदस्यीय मेडिकल टीम तैनात की गई है। इसमें लगभग 20 डॉक्टर और 50 से अधिक पैरामेडिकल कर्मचारी शामिल हैं। ये टीमें यात्रा मार्ग पर आने वाली किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम

अमरनाथ यात्रा को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां भी पूरी तरह सतर्क हैं। यात्रा मार्ग, बेस कैंप और पवित्र गुफा क्षेत्र में सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की गई है। सीसीटीवी कैमरों, ड्रोन और आधुनिक निगरानी प्रणाली की मदद से पूरे मार्ग पर नजर रखी जा रही है।

57 दिनों तक चलेगी यात्रा

इस वर्ष अमरनाथ यात्रा कुल 57 दिनों तक चलेगी। यात्रा का समापन श्रावण पूर्णिमा और रक्षाबंधन के अवसर पर होगा। प्रशासन को उम्मीद है कि इस बार लाखों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन करेंगे।

आस्था के साथ व्यवस्था भी जरूरी

अमरनाथ यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है। इस वर्ष यात्रा में रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। ऐसे में प्रशासन लगातार व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने में जुटा है।

हालांकि प्राकृतिक हिम शिवलिंग का आकार इस बार छोटा हुआ है, लेकिन श्रद्धालुओं की श्रद्धा और विश्वास पहले की तरह अटूट बना हुआ है। प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे केवल पंजीकरण के बाद ही यात्रा करें, मौसम संबंधी निर्देशों का पालन करें और सुरक्षा नियमों का पूरी तरह पालन करते हुए बाबा बर्फानी के दर्शन करें। इससे यात्रा सुरक्षित, सुगम और सफल बनी रहेगी।

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