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नोएडा हिंसा के पीछे साजिश की परतें खुल रही हैं, 66 गिरफ्तारियों में 45 लोग मजदूर नहीं!

नोएडा हिंसा के पीछे साजिश की परतें खुल रही हैं, 66 गिरफ्तारियों में 45 लोग मजदूर नहीं!

@रिपोर्ट : राहुल भदौरिया – रेजीडेंट एडिटर

उत्तर प्रदेश : नोएडा और ग्रेटर नोएडा में 13 अप्रैल 2026 को मजदूरों के सैलरी वृद्धि को लेकर हुए प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया था। अब पुलिस की गहन जांच में चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। पुलिस का कहना है कि इस हिंसा के पीछे एक सुनियोजित साजिश काम कर रही थी। गिरफ्तार किए गए कुल 66 आरोपियों में से 45 लोग असल में मजदूर थे ही नहीं। ये खुलासा पूरे मामले को नई दिशा दे रहा है और जांच एजेंसियां अब संगठित साजिश की गहराई में उतर रही हैं। पुलिस जांच के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान आगजनी करने वाले 17 लोगों की पहचान कर ली गई है, जिनमें से 11 को पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया है। इन 11 में से 8 लोग मजदूर नहीं बताए जा रहे हैं। इसी तरह, भड़काने वाले 32 लोगों की भी पहचान हुई है, जिनमें से 19 को अरेस्ट किया जा चुका है। इनमें ज्यादातर आरोपी किसी न किसी संगठन से जुड़े हुए पाए गए हैं। पुलिस ने 4 लोगों को साजिश रचने और षडयंत्र के आरोप में भी गिरफ्तार किया है।

एक विशेष रूप से चौंकाने वाली बात यह है कि आगजनी, पथराव और हिंसा भड़काने वाले अधिकांश आरोपी स्थानीय मजदूर नहीं थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, ये लोग बाहरी तत्व थे जो प्रदर्शन को जानबूझकर हिंसक बनाने के लिए भेजे गए थे। इस पूरे घटनाक्रम में अब तक प्रीवेंटिव अरेस्ट सहित 600 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है।


17 व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए हिंसा की प्लानिंग : जांच के दौरान पुलिस को 17 अलग-अलग व्हाट्सएप ग्रुप का पता चला है, जिनके माध्यम से हिंसा को भड़काने की कोशिश की गई थी। इन ग्रुप्स में गलत सूचनाएं फैलाई जा रही थीं और मजदूरों को उकसाया जा रहा था। पुलिस ने इन ग्रुप्स से जुड़े एक प्रमुख आरोपी रूपेश राय को भी गिरफ्तार कर लिया है। रूपेश राय पर संगठन के साथ मिलकर हिंसा को संगठित करने का आरोप है। पुलिस अधिकारीयों का कहना है कि शुरुआत में ये मामला सिर्फ मजदूरों का सैलरी विवाद लग रहा था, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर साजिश की कई परतें सामने आ रही हैं। कई आरोपी ऐसे संगठनों से जुड़े पाए गए हैं जो औद्योगिक क्षेत्र में अशांति फैलाने में सक्रिय रहे हैं। पुलिस अब इन संगठनों की गहराई तक जांच कर रही है कि आखिर किसके इशारे पर ये लोग काम कर रहे थे और क्या कोई बड़ा राजनीतिक या सामाजिक एजेंडा इसके पीछे था।


क्या था पूरा मामला? : 13 अप्रैल 2026 को नोएडा और ग्रेटर नोएडा के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों ने सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू किया। शुरुआत में शांतिपूर्ण लग रहा ये आंदोलन जल्द ही हिंसक हो गया। प्रदर्शनकारियों ने कई जगहों पर वाहनों में आग लगा दी, पथराव किया और सड़कों को जाम कर दिया। इससे इलाके में भारी तनाव फैल गया और सुरक्षा बलों को मौके पर बुलाना पड़ा। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए कई लोगों को हिरासत में लिया। अब जांच में सामने आ रहा है कि कुछ बाहरी तत्वों ने इस मौके का फायदा उठाकर हिंसा को भड़काया। मजदूरों की असली मांगों को दरकिनार कर कुछ लोग जानबूझकर अराजकता फैलाने में लगे थे।


जांच आगे बढ़ रही है : पुलिस ने इस मामले में कई अहम सुराग हासिल किए हैं। व्हाट्सएप ग्रुप्स के अलावा, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन डेटा और गवाहों के बयानों के आधार पर और गिरफ्तारियां होने की संभावना है। उत्तर प्रदेश पुलिस के उच्च अधिकारी लगातार मामले की निगरानी कर रहे हैं और दोषियों को सख्त सजा दिलाने का भरोसा दिलाया है। नोएडा हिंसा का ये मामला सिर्फ एक औद्योगिक विवाद नहीं रह गया है, बल्कि ये अब संगठित साजिश की ओर इशारा कर रहा है। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद कई बड़े खुलासे और होने की उम्मीद है। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।


 

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