राजनांदगांव: छत्तीसगढ़ में टेक्सटाइल उद्योग को बढ़ावा देने की चर्चा के बीच राजनांदगांव में नई टेक्सटाइल यूनिट शुरू करने की मांग उठी है। भारतीय जनता पार्टी के नेता अशोक चौधरी ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से राजनांदगांव को टेक्सटाइल उद्योग की एक इकाई देने का आग्रह किया है। अशोक चौधरी ने कहा कि राजनांदगांव का औद्योगिक इतिहास काफी पुराना है। ऐसे में शहर में दोबारा टेक्सटाइल उद्योग शुरू होने से रोजगार और विकास के नए अवसर बन सकते हैं।
बीएनसी मिल की जमीन पर टेक्सटाइल यूनिट की मांग
अशोक चौधरी ने सुझाव दिया कि राजनांदगांव में टेक्सटाइल यूनिट के लिए BNC मिल परिसर की जमीन का इस्तेमाल किया जा सकता है। उनके अनुसार, यहां करीब 54 एकड़ जमीन मिल स्थापित करने के उद्देश्य से उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि यह जमीन फिलहाल एनटीपीसी के कब्जे में है। ऐसे में सरकार इस जमीन के उपयोग की संभावनाओं पर विचार कर सकती है। अशोक चौधरी ने मुख्यमंत्री से इस मामले में पहल करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि बीएनसी मिल परिसर में आधुनिक टेक्सटाइल यूनिट शुरू होने से शहर को बड़ा फायदा मिल सकता है।
राजनांदगांव का टेक्सटाइल उद्योग से पुराना रिश्ता
अशोक चौधरी ने राजनांदगांव के औद्योगिक इतिहास का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 1887 में राजनांदगांव के राजा बलराम दास ने यहां बीएनसी मिल की स्थापना की पहल की थी। बीएनसी मिल का पूरा नाम बंगाल नागपुर कॉटन मिल था। अपने समय में यह क्षेत्र की प्रमुख कॉटन मिलों में शामिल थी। मिल के कारण राजनांदगांव की औद्योगिक पहचान मजबूत हुई। इसके साथ ही हजारों परिवारों की आजीविका भी जुड़ी रही।
वर्ष 2002 में बंद हुई थी बीएनसी मिल
अशोक चौधरी के अनुसार, बीएनसी मिल लंबे समय तक राजनांदगांव की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा रही। यहां बड़ी संख्या में लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिला। हालांकि, विभिन्न अव्यवस्थाओं के कारण वर्ष 2002 में मिल बंद हो गई। इसके बाद शहर की औद्योगिक गतिविधियों पर भी इसका असर पड़ा। अब बीएनसी मिल परिसर में आधुनिक उद्योग शुरू करने की मांग उठी है। इससे पुराने औद्योगिक क्षेत्र को फिर से सक्रिय करने की उम्मीद जताई जा रही है।
बुरहानपुर की मिल का दिया उदाहरण
अशोक चौधरी ने बुरहानपुर की बंद मिल का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि बंद पड़ी औद्योगिक इकाइयों और उपलब्ध संसाधनों का सही इस्तेमाल किया जाए तो रोजगार के बड़े अवसर बनाए जा सकते हैं। उनके अनुसार, बुरहानपुर की एक बंद मिल को बाद में सूत कताई यूनिट के रूप में दोबारा शुरू किया गया। आज वहां करीब 6000 मजदूर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसी तरह राजनांदगांव में भी बीएनसी मिल से जुड़ी जमीन और संसाधनों का उपयोग किया जा सकता है।
1500 लोगों को मिल सकता है रोजगार
अशोक चौधरी ने दावा किया कि राजनांदगांव में टेक्सटाइल यूनिट शुरू होने पर शुरुआती चरण में करीब 1500 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिल सकता है। उद्योग के विस्तार के साथ रोजगार के अवसर और बढ़ सकते हैं। इससे स्थानीय युवाओं को अपने शहर में काम मिलने की संभावना बढ़ेगी। टेक्सटाइल उद्योग से केवल फैक्ट्री में काम करने वाले लोगों को ही फायदा नहीं होगा। इसके साथ कई दूसरे क्षेत्रों में भी रोजगार पैदा हो सकता है।
परिवहन और व्यापार को भी मिलेगा फायदा
टेक्सटाइल उद्योग शुरू होने से स्थानीय परिवहन क्षेत्र को भी बढ़ावा मिल सकता है। कच्चे माल और तैयार उत्पादों की आवाजाही बढ़ेगी। इसके अलावा छोटे कारोबार और सेवा क्षेत्र को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। पैकेजिंग, ट्रांसपोर्ट, मरम्मत और अन्य सहायक सेवाओं में काम बढ़ सकता है। इससे राजनांदगांव की स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलने की संभावना है।
एनटीपीसी के जरिए यूनिट लगाने का सुझाव
अशोक चौधरी ने टेक्सटाइल यूनिट स्थापित करने के लिए एनटीपीसी के माध्यम से पहल करने का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि बीएनसी मिल परिसर की उपलब्ध जमीन का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए संबंधित विभागों को व्यवहारिक संभावनाओं का अध्ययन करना चाहिए। उन्होंने सरकार और अधिकारियों से इस योजना पर गंभीरता से विचार करने की अपील की है।
बीएनसी मिल कार्यालय में योजना तैयार होने का दावा
अशोक चौधरी ने कहा कि बीएनसी मिल के कार्यालय में इस संबंध में पूरी योजना तैयार है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से योजना का अवलोकन करने की मांग की। उनके अनुसार, योजना की व्यवहारिकता की जांच के बाद आगे की कार्रवाई शुरू की जा सकती है। उन्होंने कहा कि राजनांदगांव में टेक्सटाइल उद्योग की नई इकाई स्थापित करने के लिए जरूरी संसाधनों और जमीन का इस्तेमाल किया जा सकता है।
सीएम साय से राजनांदगांव को यूनिट देने की मांग
अशोक चौधरी ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से विशेष आग्रह किया कि प्रस्तावित टेक्सटाइल यूनिट में से कम से कम एक इकाई राजनांदगांव को दी जाए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में नए उद्योगों को बढ़ावा देने के प्रयास हो रहे हैं। ऐसे में राजनांदगांव को भी इस औद्योगिक विस्तार का लाभ मिलना चाहिए। उनका कहना है कि बीएनसी मिल परिसर में आधुनिक टेक्सटाइल उद्योग शुरू होने से राजनांदगांव की पुरानी औद्योगिक पहचान को नई दिशा मिल सकती है।
युवाओं के लिए बनेंगे रोजगार के अवसर
राजनांदगांव में टेक्सटाइल यूनिट शुरू होने से स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलने की उम्मीद जताई गई है। इससे उन्हें काम के लिए दूसरे शहरों में जाने की जरूरत कम हो सकती है। अशोक चौधरी ने कहा कि उद्योग के साथ छोटे कारोबार भी विकसित होंगे। इससे शहर की आर्थिक गतिविधियों में बढ़ोतरी हो सकती है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि टेक्सटाइल उद्योग की नई इकाइयों में राजनांदगांव के बीएनसी मिल परिसर को प्राथमिकता दी जाए।



