कानपुर। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को तीन राज्यों में मिली प्रचंड जीत के बाद देशभर में उत्सव का माहौल देखने को मिल रहा है। इसी कड़ी में कानपुर में भी भव्य जश्न आयोजित किया गया। लोकसभा सांसद रमेश अवस्थी के आवास और कार्यालय पर पार्टी कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों और समर्थकों की भारी भीड़ उमड़ी, जहां जीत की खुशी को जोरदार तरीके से मनाया गया। कार्यक्रम स्थल को आकर्षक रोशनी से सजाया गया था। जैसे ही चुनाव परिणामों की पुष्टि हुई, कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न शुरू कर दिया। आसमान रंग-बिरंगी आतिशबाजी से जगमगा उठा और पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल बन गया। इस दौरान “मोदी-मोदी” और भाजपा के समर्थन में नारे लगातार गूंजते रहे। जश्न के दौरान राहगीरों और स्थानीय लोगों को मिष्ठान्न के साथ-साथ झालमूड़ी भी वितरित की गई। लोग एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर जीत की बधाई देते नजर आए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मौजूद कार्यकर्ताओं ने इस जीत को ऐतिहासिक बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर भरोसा जताया।
हालांकि सांसद रमेश अवस्थी इस समय पश्चिम बंगाल में मौजूद हैं। उन्हें केंद्र सरकार द्वारा वहां चुनावी कोर कमेटी का सदस्य बनाया गया था और लगभग 30 से अधिक सीटों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसके साथ ही उन्हें प्रशासनिक समन्वय की भी अहम जिम्मेदारी दी गई थी।
इस अवसर पर सांसद के पुत्र और पूर्व भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य सचिन अवस्थी ने कहा कि यह जीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, उनकी नीतियों और जनता के विश्वास का परिणाम है। उन्होंने दावा किया कि चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष और भयमुक्त वातावरण में संपन्न हुए, जिसमें जनता ने विकास और सुशासन के पक्ष में स्पष्ट जनादेश दिया है।
वहीं, सांसद के छोटे पुत्र और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता शुभम अवस्थी ने भी विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव परिणामों ने यह साबित कर दिया है कि जनता अब हिंसा और तुष्टिकरण की राजनीति को स्वीकार नहीं करती। उन्होंने इसे लोकतंत्र की जीत बताते हुए कहा कि अब देश में विकास की राजनीति और अधिक मजबूत होगी। भाजपा पदाधिकारियों ने कहा कि यह जीत संगठन की मजबूती और कार्यकर्ताओं की मेहनत का परिणाम है। साथ ही उन्होंने आगामी चुनावों के लिए अभी से तैयारी में जुटने का आह्वान भी किया। कुल मिलाकर, कानपुर में मनाया गया यह जश्न भाजपा कार्यकर्ताओं के उत्साह और ऊर्जा का प्रतीक रहा, जिसने राजनीतिक माहौल को पूरी तरह उत्सव में बदल दिया।
