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बिहार में भाजपा की नई रणनीति का चेहरा बने सम्राट चौधरी, सत्ता के शीर्ष तक पहुंचने की मजबूत संभावना, मुख्यमंत्री की लिस्ट में सबसे आगे!

बिहार में भाजपा की नई रणनीति का चेहरा बने सम्राट चौधरी, सत्ता के शीर्ष तक पहुंचने की मजबूत संभावना, मुख्यमंत्री की लिस्ट में सबसे आगे!
Samrat Choudhary has emerged as the face of the BJP's new strategy in Bihar, with strong potential for ascendancy to power, and is at the forefront of the Chief Ministerial race.

रिपोर्ट: राहुल भदौरिया, रेजिडेंट एडिटर

बिहार की राजनीति में इन दिनों एक नाम तेजी से चर्चा में है वो नाम है सम्राट चौधरी। विभिन्न राजनीतिक दलों में अनुभव हासिल करने के बाद भारतीय जनता पार्टी में उनकी एंट्री ने उनके करियर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। आज वे न केवल बिहार भाजपा के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं, बल्कि भविष्य के संभावित मुख्यमंत्री के तौर पर भी देखे जा रहे हैं। क्यों कि उनका नाम अभी सबसे आगे चल रहा है । हालांकि जबसे इस चुनावी यात्रा की शुरवात हुई थी तबसे ही FM न्यूज़ ने सम्राट चौधरी को बिहार के मुख्यमंत्री की रेस में प्रबल दावेदार दिखाया था, जोकि आज लगभग सत्य होने की दिशा में स्पस्ट नज़र आ रहा है ।

बताते चले मुंगेर जिले के लखनपुर गांव में 16 नवंबर 1968 को जन्मे सम्राट चौधरी का संबंध कुशवाहा (कोइरी) समुदाय से है, जो राज्य की राजनीति में प्रभावशाली ओबीसी वर्ग माना जाता है। उनके पिता शकुनी चौधरी भी सक्रिय राजनीतिज्ञ रहे, जिससे सम्राट को शुरुआती दौर में ही राजनीतिक माहौल मिला। उच्च शिक्षा प्राप्त कर उन्होंने सामाजिक सेवा के साथ राजनीति की राह चुनी। लोगों के बीच सम्राट का वर्चस्ववादी चेहरा बिहार की राजनीति में आज भाजपा का पवार सेंटर माना जा रहा है ।

1990 के दशक में उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की। वर्ष 1999 में मात्र 30 साल की उम्र में राबड़ी देवी सरकार में कृषि मंत्री बनाए गए, हालांकि तकनीकी कारणों से उन्हें पद छोड़ना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने 2000 और 2010 में परबत्ता विधानसभा सीट से जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत की और आरजेडी में अहम भूमिका निभाई।

2014 में उन्होंने आरजेडी से अलग राह चुनी और जितन राम मांझी सरकार में मंत्री बने। इसके बाद वे जेडीयू के करीब आए, लेकिन 2017-18 में भाजपा में शामिल होना उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ। भाजपा में उन्हें तेजी से जिम्मेदारियां मिलीं । राज्य उपाध्यक्ष से लेकर प्रदेश अध्यक्ष तक का सफर उन्होंने कुछ ही वर्षों में तय कर लिया।

2023 में उन्हें बिहार भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया, जहां उन्होंने संगठन को मजबूत करने और राजनीतिक रणनीति को धार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 2024 में वे बिहार के उप मुख्यमंत्री बने और वित्त, स्वास्थ्य, शहरी विकास सहित कई अहम विभागों की जिम्मेदारी संभाली। बाद में गृह विभाग का प्रभार मिलना उनके बढ़ते कद का संकेत था।

2025 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने तारापुर सीट से जीत दर्ज कर अपनी लोकप्रियता साबित की और दोबारा उप मुख्यमंत्री बने। भाजपा द्वारा उन्हें लगातार प्रमुख जिम्मेदारियां देना इस बात का प्रमाण है कि पार्टी उन्हें बिहार की राजनीति में बड़े चेहरे के रूप में तैयार कर रही है। सम्राट चौधरी की सियासी यात्रा इस बात का उदाहरण है कि सही रणनीति, संगठनात्मक पकड़ और सामाजिक समीकरणों के संतुलन से कोई नेता तेजी से शीर्ष तक पहुंच सकता है। ओबीसी चेहरे के रूप में उनकी मजबूत पकड़ और केंद्र नेतृत्व से तालमेल उन्हें बिहार की सत्ता के शीर्ष पद के बेहद करीब ले जाता है। आने वाले समय में यदि भाजपा को स्पष्ट जनादेश मिलता है, तो सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी।


 

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