मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और संभावित महायुद्ध की आशंकाओं के बीच चीन ने भारत के साथ रिश्तों को लेकर बड़ा बयान दिया है। चीन के विदेश मंत्री Wang Yi ने कहा है कि भारत और चीन को एक-दूसरे को प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि साझेदार के रूप में देखना चाहिए। उनका मानना है कि दोनों देशों के बीच सहयोग एशिया और वैश्विक दक्षिण के विकास के लिए बेहद जरूरी है।
बीजिंग में National People’s Congress के 14वें सत्र के दौरान आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में वांग यी ने भारत-चीन संबंधों पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि भारत और चीन केवल पड़ोसी देश ही नहीं हैं, बल्कि दोनों “ग्लोबल साउथ” के महत्वपूर्ण हिस्से भी हैं। दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंध और कई साझा आर्थिक हित मौजूद हैं।
चीनी विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि अगर भारत और चीन आपसी विश्वास और सहयोग को मजबूत करते हैं, तो इससे पूरे एशिया को फायदा होगा। वहीं, टकराव और विभाजन से एशिया के पुनरुत्थान की प्रक्रिया कमजोर पड़ सकती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों देशों को मतभेदों को बातचीत और सहयोग के जरिए हल करना चाहिए।
समाचार एजेंसी Xinhua News Agency के अनुसार, प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वांग यी ने घरेलू और विदेशी पत्रकारों के सवालों के जवाब देते हुए चीन की विदेश नीति और वैश्विक मुद्दों पर भी अपनी राय रखी।
उन्होंने संकेत दिया कि भारत और चीन के रिश्ते धीरे-धीरे सामान्य पटरी पर लौट रहे हैं। ऐसे में दोनों देशों के पास आर्थिक सहयोग, व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ाने का अच्छा मौका है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक तनाव के दौर में भारत और चीन का सहयोग एशिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकता है।


