झारखंड के हजारीबाग स्थित शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब अस्पताल में अचानक ब्लैकआउट हो गया। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर बिजली चले जाने से मरीजों, उनके परिजनों और अस्पताल कर्मचारियों के बीच चिंता का माहौल बन गया। घटना के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं।
बताया जा रहा है कि ब्लैकआउट के दौरान अस्पताल के कई हिस्सों में अंधेरा छा गया। मरीजों के इलाज और जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं पर भी इसका असर पड़ा। खासकर उन वार्डों में जहां गंभीर मरीज भर्ती थे, वहां मौजूद लोगों की चिंता बढ़ गई। अस्पताल में मौजूद परिजनों का कहना है कि कुछ समय के लिए उन्हें समझ ही नहीं आया कि आखिर क्या हुआ है।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, बिजली आपूर्ति में आई तकनीकी समस्या के कारण यह स्थिति पैदा हुई। हालांकि, अस्पताल में मौजूद बैकअप सिस्टम को सक्रिय करने की कोशिश की गई ताकि मरीजों को किसी तरह की परेशानी न हो। अधिकारियों का दावा है कि स्थिति को जल्द ही नियंत्रण में ले लिया गया और आवश्यक सेवाएं बहाल कर दी गईं। इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाया जाएगा कि आखिर ब्लैकआउट क्यों हुआ और क्या इसमें किसी तरह की लापरवाही हुई है। यदि जांच में किसी की जिम्मेदारी तय होती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों में बिजली व्यवस्था का मजबूत और सुरक्षित होना बेहद जरूरी है।
ऑपरेशन थिएटर, ICU और इमरजेंसी वार्ड जैसी जगहों पर बिजली की एक छोटी सी समस्या भी मरीजों की जान के लिए खतरा बन सकती है। इसलिए ऐसी घटनाओं को हल्के में नहीं लिया जा सकता। फिलहाल अस्पताल में स्थिति सामान्य बताई जा रही है, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर स्वास्थ्य संस्थानों में बुनियादी सुविधाओं की मजबूती को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर है, जिससे यह साफ हो सकेगा कि ब्लैकआउट के पीछे असली वजह क्या थी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।
इस घटना के बाद मरीजों के परिजनों ने अस्पताल की बिजली व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अस्पताल जैसे महत्वपूर्ण संस्थान में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए मजबूत बैकअप व्यवस्था होनी चाहिए। लोगों का मानना है कि यदि ब्लैकआउट अधिक समय तक रहता, तो गंभीर मरीजों के लिए स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो सकती थी। इसी वजह से अब लोग जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।




