Arab Military Force Power: पीएम मोदी के ओमान दौरे के बीच अरब देशों की सैन्य ताक़त पर नजर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों ओमान के दौरे पर हैं। भारत और ओमान के बीच रक्षा और रणनीतिक सहयोग लगातार मजबूत होता जा रहा है। खास बात यह है कि ओमान पहला खाड़ी देश है, जिसके साथ भारत की थलसेना, नौसेना और वायुसेना—तीनों संयुक्त सैन्य अभ्यास करती हैं। ऐसे में पीएम मोदी की इस यात्रा के साथ अरब देशों की सैन्य ताक़त एक बार फिर चर्चा में आ गई है।
स्वाभाविक सवाल उठता है कि अरब देशों में सबसे ताक़तवर सेना किसके पास है? और अपेक्षाकृत छोटे लेकिन स्थिर देश ओमान की सैन्य स्थिति इस क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में कहां खड़ी है?

सैन्य ताक़त कैसे मापी जाती है?
दुनियाभर में किसी देश की पारंपरिक सैन्य क्षमता को आंकने के लिए कई इंडेक्स का उपयोग किया जाता है। इनमें सबसे प्रमुख है Global Firepower Index (GFP)। यह इंडेक्स सैनिकों की संख्या, टैंक और लड़ाकू विमानों की गिनती, रक्षा बजट, लॉजिस्टिक्स, भौगोलिक स्थिति और रणनीतिक क्षमताओं जैसे दर्जनों मानकों के आधार पर देशों की रैंकिंग करता है।

अरब देशों में किसके पास सबसे ताक़तवर सेना?
Global Firepower Index 2025 की Middle East Military Strength रैंकिंग के अनुसार, इस क्षेत्र में तुर्किए पहले स्थान पर है, जबकि दूसरे और तीसरे स्थान पर क्रमशः इज़राइल और ईरान हैं। इनके बाद मिस्र, सऊदी अरब और इराक जैसे देश आते हैं।
यदि गैर-अरब देशों—तुर्किए, इज़राइल और ईरान—को सूची से अलग कर दिया जाए, तो अरब दुनिया में सबसे ताक़तवर सेनाओं में मिस्र, सऊदी अरब, इराक और यूएई को प्रमुख रूप से गिना जाता है।
मिस्र: संख्या और पारंपरिक ताक़त में सबसे आगे
मिस्र को पारंपरिक रूप से अरब दुनिया की सबसे बड़ी और शक्तिशाली सेना माना जाता है। Global Firepower की 2025 रैंकिंग में मिस्र का Power Index लगभग 0.3427 है, जो इसे वैश्विक स्तर पर भी शीर्ष 20 सेनाओं में शामिल करता है।
मिस्र की ताक़त के प्रमुख कारण हैं—
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बड़ी स्थायी सेना और मजबूत रिज़र्व फोर्स
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टैंकों, बख़्तरबंद वाहनों और तोपखाने की बड़ी संख्या
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स्वेज नहर जैसे रणनीतिक जलमार्ग पर नियंत्रण
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अमेरिका, रूस और फ्रांस से विविध हथियार आपूर्ति
इन्हीं कारणों से जमीनी सेना और संख्या के लिहाज़ से मिस्र को अरब दुनिया की सबसे पावरफुल मिलिट्री माना जाता है।

सऊदी अरब: पैसा और आधुनिक टेक्नोलॉजी की शक्ति
जहां मिस्र संख्या में आगे है, वहीं सऊदी अरब आधुनिक तकनीक, वायु शक्ति और रक्षा बजट के मामले में बेहद मज़बूत है। Global Firepower Index 2025 में सऊदी अरब का Power Index लगभग 0.4201 है और यह दुनिया की शीर्ष 25 सेनाओं में शामिल है।
सऊदी अरब की सैन्य ताक़त की विशेषताएं हैं—
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अत्याधुनिक लड़ाकू विमान जैसे F-15 और Eurofighter Typhoon
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उन्नत मिसाइल डिफेंस सिस्टम और ड्रोन टेक्नोलॉजी
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दुनिया के सबसे बड़े रक्षा बजटों में से एक
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यमन संघर्ष जैसे युद्धों का व्यावहारिक अनुभव
तकनीकी और हाई-टेक क्षमताओं के आधार पर सऊदी अरब को अरब दुनिया की सबसे आधुनिक सेना माना जाता है।
ओमान किस पायदान पर है?
Global Firepower की 2025 की Middle East Military Strength सूची में ओमान को 13वां स्थान मिला है, जबकि उसका Power Index लगभग 1.8047 दर्ज किया गया है। क्षेत्रीय रैंकिंग में ओमान से ऊपर मिस्र, सऊदी अरब, यूएई, इराक, सीरिया, क़तर और जॉर्डन जैसे देश हैं, जबकि नीचे केवल यमन और लेबनान आते हैं।
हालांकि रैंकिंग में ओमान निचले पायदान पर दिखता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि ओमान की सेना कमजोर है।
प्रशिक्षण और रणनीति में मजबूत ओमान
ओमान की आबादी कम होने के कारण उसकी सेना का आकार सीमित है, लेकिन ट्रेनिंग और प्रोफेशनलिज़्म के मामले में वह काफी आगे है। ब्रिटेन के साथ लंबे समय से चले आ रहे सैन्य सहयोग के चलते ओमानी सैनिकों और अधिकारियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण मिलता है।
इसके अलावा—
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ओमान की भौगोलिक स्थिति, विशेषकर Strait of Hormuz के पास होना, उसे सामरिक रूप से बेहद अहम बनाती है
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यह देश क्षेत्रीय विवादों में संतुलित और न्यूट्रल भूमिका निभाता है
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सीमित संसाधनों में भी संतुलित थल, वायु और नौसेना क्षमता बनाए रखता है
सबसे पावरफुल अरब सेना कौन?
इस सवाल का जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि आप कौन-सा पैमाना चुनते हैं।
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संख्या और पारंपरिक ताक़त के लिहाज़ से मिस्र सबसे आगे है
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आधुनिक हथियार और टेक्नोलॉजी के मामले में सऊदी अरब और यूएई मजबूत हैं
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जबकि रणनीतिक संतुलन और स्थिरता में ओमान की भूमिका अलग और महत्वपूर्ण है
कुल मिलाकर, अरब दुनिया में सैन्य शक्ति एकतरफा नहीं है, बल्कि अलग-अलग देशों की ताक़त अलग-अलग मानकों पर आधारित है।
पीएम मोदी का ओमान दौरा इसी संतुलित और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।



