इंडिगो फ्लाइट कैंसिलेशन का मामला आज लोकसभा और राज्यसभा दोनों में जोर-शोर से उठा। लगातार उड़ानें रद्द होने के कारण यात्रियों के साथ सांसद भी परेशान हैं। विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरा और जवाबदेही तय करने की मांग की।
लोकसभा में BJP सांसद ने भी उठाई आवाज
लोकसभा में बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि नई ड्यूटी-टाइम गाइडलाइन लागू करने के बाद भी एयरलाइंस तैयार नहीं रहीं। उन्होंने पूछा—DGCA नियम बनाकर छोड़ देता है, पालन कौन कराए? सांसदों ने कहा कि सत्र खत्म होने के बाद अपने क्षेत्रों में लौटना मुश्किल हो रहा है।

विपक्ष का तंज: सरकार मोनोपॉली चला रही है
विपक्षी दलों ने केंद्र पर एयरलाइंस के लिए एकाधिकार जैसा माहौल बनाने का आरोप लगाया। राहुल गांधी ने फ्लाइट कैंसिलेशन को सरकार की नीतियों की विफलता बताया। कई सांसदों ने कहा—यात्रियों के लिए रिफंड और रीबुकिंग का स्पष्ट नियम कब बनेगा?
राज्यसभा में नोटिस, तत्काल चर्चा की मांग
राज्यसभा में कांग्रेस और शिवसेना के सांसदों ने इस मुद्दे पर नोटिस दिया। विपक्ष चाहता है कि नागरिक उड्डयन मंत्री खुद आकर स्थिति स्पष्ट करें और बताएं कि कब तक हालात सामान्य होंगे।
सरकार का जवाब: स्थिति पर निगरानी, राहत के कदम
सरकार ने कहा कि DGCA और मंत्रालय लगातार समीक्षा कर रहे हैं। पायलट ड्यूटी टाइम नियमों में अस्थायी छूट देकर ऑपरेशन संभालने की कोशिश की जा रही है। सरकार ने एक चार-सदस्यीय कमेटी भी बनाई है, जो शेड्यूलिंग और नियमों पर सुझाव देगी।
क्यों बिगड़े हालात
पायलटों के ड्यूटी टाइम और साप्ताहिक रेस्ट की नई गाइडलाइन , शेड्यूलिंग सिस्टम अपडेट न होने से क्रू की कमी
नतीजा: सैकड़ों उड़ानें रद्द और हजारों यात्री फंस गए
असर कितना बड़ा सोचना भी मुश्किल
दिल्ली, बेंगलुरु, मुंबई और चेन्नई में यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ा। सैकड़ों फ्लाइट्स या तो कैंसिल हुईं या कई-कई घंटे लेट चलीं। इंडिगो ने बयान में कहा है कि वह 10 फरवरी तक परिचालन सामान्य करने की कोशिश में है।
कौन है संकट का जिम्मेदार
क्या नियम सख्त किए गए, या इंडस्ट्री की तैयारी कम रही? संसद में यही मुद्दा सबसे ज्यादा गूंजा—जवाबदेही किसकी तय होगी?
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