जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले के सुरनकोट में शनिवार को सेंट्रल दारुल उलूम रिज़विया सुल्तानिया, जामिया मस्जिद में उलेमाओं और इस्लामी विद्वानों की बड़ी बैठक हुई। जमात-ए-अहले सुन्नत सुबह जम्मू के बैनर तले बुलाए गए इस सम्मेलन में तहसील भर से आए 250 से अधिक इमाम, मौलवी और निकाहख्वान मौजूद रहे।
शादियों में DJ, डांस और तेज़ संगीत पूरी तरह प्रतिबंधित
बैठक में सर्वसम्मति से तय किया गया कि अब शादी समारोह पूरी तरह सादगी से होंगे। उलेमाओं ने स्पष्ट घोषणा की कि DJ, तेज़ संगीत, डांस और गैर-इस्लामी रस्में अब मंजूर नहीं होंगी।
कठोर निर्देश दिया गया — ऐसे आयोजनों में कोई धर्मगुरु निकाह नहीं पढ़ाएगा और समाज स्तर पर इन कार्यक्रमों का बहिष्कार किया जाएगा।
निकाह कौन पढ़ाएगा, नया नियम
कान्फ्रेंस में यह अहम फैसला भी लिया गया कि किसी भी निकाह की जिम्मेदारी सिर्फ उसी इलाके के स्थानीय इमाम की होगी।
यदि परिवार किसी बाहरी इमाम को बुलाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी और उसका रजिस्टर भी जब्त किया जा सकता है।
निकाह शुल्क का नया ढांचा
उलेमाओं ने बताया कि निकाह शुल्क 1990 के दशक से अपडेट नहीं हुआ था।
नए फैसले के अनुसार—
- संपन्न परिवार 11,000 रुपये देंगे
- आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को पूरी छूट रहेगी
यह निर्णय इमाम-ए-आज़म अबू हनीफ़ा की रहनुमाई और मौजूदा फतवों के आधार पर लिया गया।
मदरसों और इमामों का मानदेय तय करने की मांग
- बैठक में सभी मस्जिद कमेटियों और मदरसों से अपील की गई कि:
- मदरसा शिक्षकों का न्यूनतम वेतन 15,000 रुपये
- मस्जिद इमामों का मानदेय 20,000 रुपये तय किया जाए, ताकि बढ़ती महंगाई में उनका जीवन सम्मानजनक ढंग से चल सके।
दो से ज्यादा व्यंजन नहीं, सिर्फ करीबी रिश्तेदार ही शामिल हों
उलेमाओं ने कहा कि शादी समारोह में सीमित मेहमान बुलाए जाएं और भोजन में दो से अधिक डिश न हों।
उद्देश्य — समाज में बराबरी रहे और आर्थिक बोझ कम हो।
संदेश: सादगी अपनाएं, धर्मगुरुओं का सम्मान बढ़ाएं
बैठक के अंत में उलेमाओं ने लोगों से अपील की कि वे शादियों को सुन्नत के मुताबिक अंजाम दें, स्थानीय धर्मगुरुओं का सम्मान करें और समाज में सादगी, नैतिकता और जिम्मेदारी का माहौल बनाएं।



