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पॉक्सो केस में बड़ा यू-टर्न: छेड़छाड़ के आरोपी को बचाने के लिए सामने आई मेडिकल फाइलें, अब डॉक्टर बताएंगे पूरा सच?

पॉक्सो केस में बड़ा यू-टर्न: छेड़छाड़ के आरोपी को बचाने के लिए सामने आई मेडिकल फाइलें, अब डॉक्टर बताएंगे पूरा सच?

 

कानपुर। बर्रा क्षेत्र में किशोरी के साथ छेड़छाड़ और अश्लीलता के मामले में जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और किशोरी द्वारा पुलिस से न्याय की गुहार लगाने के बाद अब पुलिस के सामने दो अलग-अलग पहलू हैं। एक ओर पीड़िता का परिवार लंबे समय से छेड़छाड़ और अश्लील हरकतों का आरोप लगा रहा है, वहीं दूसरी ओर आरोपी किशोर के परिजनों ने उसे मानसिक रूप से बीमार बताते हुए कई वर्षों के इलाज से जुड़े मेडिकल दस्तावेज पुलिस को सौंप दिए हैं। अब पुलिस इन दस्तावेजों की सत्यता की पुष्टि करने के लिए डॉक्टरों, स्कूल प्रशासन और आरोपी के सहपाठियों से पूछताछ करेगी।

 

पुलिस के अनुसार, आरोपी किशोर के परिवार ने उरई जिला अस्पताल के अलावा कानपुर के कई मनोचिकित्सकों के इलाज संबंधी पर्चे और रिकॉर्ड उपलब्ध कराए हैं। इन दस्तावेजों में दावा किया गया है कि किशोर पिछले करीब तीन वर्षों से मानसिक समस्याओं का इलाज करा रहा है। रिपोर्टों में उसे पढ़ाई में कमजोर, अनुशासनहीन, अत्यधिक गुस्सैल और कई बार स्वयं या दूसरों को नुकसान पहुंचाने की प्रवृत्ति वाला बताया गया है। हालांकि, पुलिस केवल मेडिकल पर्चों के आधार पर किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहती। इसलिए संबंधित चिकित्सकों से इलाज की पूरी जानकारी ली जाएगी और यह भी पता लगाया जाएगा कि उसकी मानसिक स्थिति वास्तव में कितनी गंभीर है।

 

जांच का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू आरोपी किशोर के व्यवहार से जुड़ा है। पुलिस अब उसके स्कूल के शिक्षकों और सहपाठियों से भी जानकारी जुटाएगी ताकि यह स्पष्ट हो सके कि क्या उसके व्यवहार को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आई थीं। स्थानीय लोगों का भी कहना है कि आरोपी की हरकतों को लेकर पहले भी कई बार उसके परिवार को शिकायत की गई थी, लेकिन उन्होंने इस पर गंभीरता नहीं दिखाई।

 

उधर, किशोरी के पिता पर भी कार्रवाई की गई है। आरोप है कि उन्होंने आरोपी पक्ष को डराने के लिए पिस्तौल जैसी दिखने वाली वस्तु दिखाई थी। पुलिस ने जांच में उस हथियार को बरामद कर लिया है, जो प्रारंभिक जांच में एयरगन निकली है। हालांकि अंतिम पुष्टि के लिए उसे फोरेंसिक प्रयोगशाला भेजा गया है। यदि रिपोर्ट में यह एयरगन साबित होती है तो हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धाराओं में संशोधन किया जा सकता है और मामला केवल धमकी देने से संबंधित धाराओं में परिवर्तित हो सकता है।


 

डीसीपी दक्षिण दीपेंद्र नाथ चौधरी का कहना है कि किशोरी की शिकायत पर पहले ही पॉक्सो अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया जा चुका है और विवेचना अंतिम चरण में है। मेडिकल रिकॉर्ड, डॉक्टरों की राय, स्कूल से मिलने वाली जानकारी तथा अन्य साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद विधिक सलाह ली जाएगी। इसके आधार पर आरोपी किशोर के विरुद्ध उचित धाराओं में आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया जाएगा।

फिलहाल यह मामला कानपुर में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर किशोरी का परिवार न्याय की मांग कर रहा है, वहीं दूसरी ओर आरोपी पक्ष मानसिक बीमारी का हवाला देकर राहत की उम्मीद लगाए हुए है। ऐसे में अब पुलिस की विस्तृत जांच और वैज्ञानिक साक्ष्य ही तय करेंगे कि इस मामले में आगे किस आधार पर कानूनी कार्रवाई होगी।

 

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