देश में मेडिकल की पढ़ाई का सपना देखने वाले लाखों छात्रों और उनके परिवारों पर हर साल कितना आर्थिक बोझ पड़ता है? इस सवाल को लेकर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने एक बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा है कि NEET परीक्षा की तैयारी और उससे जुड़ी पूरी व्यवस्था के कारण हर साल करीब 22 लाख छात्रों और उनके परिवारों से लगभग ₹1.32 लाख करोड़ खर्च करवाए जाते हैं। उनका कहना है कि यह राशि केंद्र सरकार के पूरे शिक्षा बजट के लगभग बराबर है।
प्रियंका गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि देश के लाखों परिवार अपने बच्चों को डॉक्टर बनाने के लिए भारी खर्च उठाते हैं। कोचिंग, हॉस्टल, यात्रा, परीक्षा फीस और अन्य खर्चों को मिलाकर यह रकम बेहद बड़ी हो जाती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने अपने पसंदीदा कारोबारियों के करीब ₹16 लाख करोड़ के लोन माफ किए हैं, जबकि छात्रों और युवाओं की समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा।

कोटा दौरे के बाद प्रियंका गांधी का बयान
प्रियंका गांधी की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी राजस्थान के कोटा दौरे पर छात्रों से मुलाकात कर चुके हैं। कोटा देश का सबसे बड़ा कोचिंग हब माना जाता है, जहां हर साल लाखों छात्र NEET और JEE जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने पहुंचते हैं।
17 जून को राहुल गांधी ने कोटा के दशहरा मैदान में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम में उन्होंने सैकड़ों छात्रों से बातचीत की और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा की।
राहुल गांधी ने कहा कि देश का मौजूदा शिक्षा तंत्र छात्रों पर जरूरत से ज्यादा दबाव डाल रहा है। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान छात्र मानसिक तनाव, आर्थिक बोझ और भविष्य की अनिश्चितता का सामना करते हैं।
“बच्चों को तनाव नहीं, अवसर मिलने चाहिए”
राहुल गांधी ने कार्यक्रम में कहा कि भारत का एजुकेशन सिस्टम बच्चों को प्रेरित करने के बजाय उन पर दबाव बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि छात्रों को ऐसे माहौल की जरूरत है जहां वे बिना डर और तनाव के अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें।
उन्होंने विशेष रूप से उन घटनाओं का जिक्र किया जिनमें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों ने तनाव के कारण आत्महत्या जैसे कदम उठाए। राहुल गांधी ने कहा कि समाज और सरकार को मिलकर ऐसी परिस्थितियों को बदलना होगा ताकि कोई भी छात्र खुद को अकेला महसूस न करे।
राहुल गांधी ने यह भी दावा किया कि NEET, JEE और अन्य बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर परिवारों की जेब से हर साल लगभग ₹5 लाख करोड़ खर्च हो जाते हैं। उनके अनुसार यह राशि कई केंद्रीय मंत्रालयों के संयुक्त बजट के बराबर है।
NTA ने किया बड़ा बदलाव
इधर NEET-UG 2026 री-एग्जाम को लेकर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने छात्रों को राहत देने वाला एक बड़ा फैसला लिया है। एजेंसी ने एडमिट कार्ड डाउनलोड करने की प्रक्रिया को आसान बना दिया है।
पहले उम्मीदवारों को एडमिट कार्ड डाउनलोड करने से पहले बैंक खाते का वेरिफिकेशन पूरा करना जरूरी था। इस वजह से कई छात्रों को तकनीकी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। अब NTA ने इस शर्त को हटा दिया है।
नई व्यवस्था के तहत छात्र पहले अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं और बाद में बैंक खाते का वेरिफिकेशन पूरा कर सकते हैं। NTA ने साफ किया है कि बैंक वेरिफिकेशन बाद में करने पर भी छात्रों को परीक्षा शुल्क रिफंड का पूरा अधिकार मिलेगा।

छात्रों को कैसे मिलेगा फायदा?
NTA के इस फैसले से उन छात्रों को राहत मिलेगी जो बैंक संबंधी तकनीकी कारणों की वजह से एडमिट कार्ड डाउनलोड नहीं कर पा रहे थे। अब उन्हें परीक्षा में शामिल होने के लिए किसी अतिरिक्त परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
एजेंसी ने कहा है कि जिन उम्मीदवारों की बैंक डिटेल्स अभी तक सत्यापित नहीं हुई हैं, वे भी तुरंत अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं और बाद में आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।
21 जून को होगा री-एग्जाम
NEET-UG 2026 की दोबारा परीक्षा 21 जून को आयोजित की जाएगी। परीक्षा दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक एक ही शिफ्ट में होगी।
NTA ने परीक्षा की अवधि में भी बदलाव किया है। पहले परीक्षा का समय 180 मिनट था, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 195 मिनट कर दिया गया है। यानी छात्रों को प्रश्नपत्र हल करने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।
इसके अलावा उम्मीदवारों को रफ वर्क के लिए अतिरिक्त शीट भी उपलब्ध कराई जाएंगी ताकि वे प्रश्नों को बेहतर तरीके से हल कर सकें।
पेपर लीक विवाद के बाद रद्द हुई थी परीक्षा
गौरतलब है कि 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा विवादों में घिर गई थी। परीक्षा के बाद कई राज्यों से पेपर लीक और अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं।
आरोप लगाया गया था कि कुछ उम्मीदवारों को परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र उपलब्ध करा दिया गया था। मामले की जांच के बाद कई गंभीर गड़बड़ियों के संकेत मिले।
इसके बाद NTA ने 12 मई को परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया। केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर दोबारा परीक्षा कराने की घोषणा की गई।
NEET क्यों है इतनी महत्वपूर्ण परीक्षा?
NEET यानी नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा है। इसके जरिए MBBS, BDS, आयुष और कई अन्य मेडिकल कोर्सों में दाखिला मिलता है।
देश के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए NEET अनिवार्य है। AIIMS और JIPMER जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एडमिशन भी इसी परीक्षा के आधार पर होता है।
हर साल लाखों छात्र डॉक्टर बनने का सपना लेकर इस परीक्षा में शामिल होते हैं। यही कारण है कि NEET से जुड़ा कोई भी विवाद पूरे देश में चर्चा का विषय बन जाता है।
शिक्षा व्यवस्था पर फिर छिड़ी बहस
प्रियंका गांधी और राहुल गांधी के बयानों ने एक बार फिर देश में शिक्षा व्यवस्था, कोचिंग संस्कृति और प्रतियोगी परीक्षाओं के बढ़ते खर्च पर बहस शुरू कर दी है।
एक तरफ लाखों परिवार अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए बड़ी रकम खर्च कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पेपर लीक और परीक्षा विवाद जैसे मामले छात्रों का भरोसा कमजोर करते हैं।
अब सभी की नजरें 21 जून को होने वाले NEET री-एग्जाम और उसके परिणामों पर टिकी हैं। साथ ही यह बहस भी जारी है कि क्या देश की शिक्षा व्यवस्था को छात्रों के लिए अधिक आसान, पारदर्शी और कम खर्चीला बनाया जा सकता है।




