@रिपोर्ट राहुल भदौरिया – रेजिडेंट एडिटर
इस्लामाबाद : पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता के तहत हुई उच्चस्तरीय शांति वार्ता रविवार को बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई। बातचीत लगभग 21 घंटे से ज्यादा समय तक चली, लेकिन दोनों पक्षों के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर गहरे मतभेद बने रहे। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट कहा कि अमेरिका बिना किसी डील के लौट रहा है और ईरान ने जरूरी शर्तों को स्वीकार नहीं किया।
वेंस ने कहा, “हम 21 घंटे तक बैठे रहे। अच्छी खबर यह है कि चर्चाएं काफी गंभीर और विस्तृत हुईं, लेकिन बुरी खबर यह है कि कोई समझौता नहीं हो सका। यह समझौता न होना अमेरिका से कहीं ज्यादा ईरान के लिए बुरी खबर है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी डील के लिए ईरान को स्पष्ट और दृढ़ वादा करना होगा कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और न ही ऐसी कोई क्षमता विकसित करेगा जिससे भविष्य में जल्दी हथियार तैयार किए जा सकें। अमेरिका की शर्तें पूरी तरह स्पष्ट थीं,
लेकिन ईरान ने उन्हें मानने से इनकार कर दिया। ईरानी पक्ष ने इसके उलट दावा किया कि अमेरिका की मांगें “जरूरत से ज्यादा सख्त” और “अनुचित” थीं, जिसकी वजह से समझौते का कोई रास्ता नहीं निकल पाया। ईरान के अनुसार होर्मुज स्ट्रेट खोलने और उसके परमाणु अधिकारों जैसे मुद्दों पर भी पेंच फंसा रहा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस और अमेरिकी डेलिगेशन
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस्लामाबाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें उनके पीछे ट्रंप के दामाद और सीनियर एडवाइजर जेरेड कुशनर (सबसे बाएं) तथा मिडिल ईस्ट के लिए ट्रंप सरकार के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ खड़े थे। वेंस ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से भी मुलाकात की और पाकिस्तान की मध्यस्थता की सराहना की। इसके बाद पूरा अमेरिकी डेलिगेशन अमेरिका के लिए रवाना हो गया। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने भी शहबाज शरीफ से मुलाकात की। गालिबाफ शुक्रवार रात पाकिस्तान पहुंचे थे और उन्होंने प्लेन में उन बच्चों की तस्वीरें साथ रखीं जो 28 फरवरी को हुए मिसाइल हमले में मारे गए थे। ईरान उस हमले का इल्जाम अमेरिका-इजराइल पर लगाता है।
अब तक की प्रमुख अपडेट्स (विस्तार से)
- 1. वार्ता पूरी तरह बेनतीजा: 21 घंटे की मैराथन बैठक के बावजूद कोई डील नहीं हुई। वेंस ने इसे “सब्स्टैंटिव” चर्चा बताया लेकिन ईरान की ओर से परमाणु हथियार न बनाने की “फंडामेंटल कमिटमेंट” न मिलने को मुख्य वजह बताया। ईरान ने अमेरिका पर “अत्यधिक मांगें” करने का आरोप लगाया।
- 2. अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट में माइंस हटाने का अभियान शुरू किया: CENTCOM (यूएस सेंट्रल कमांड) ने घोषणा की कि अमेरिकी युद्धपोत (USS Frank E. Peterson और USS Michael Murphy) स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान द्वारा बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाने की तैयारी कर रहे हैं। इसका मकसद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को सुरक्षित बनाना और वैश्विक व्यापार को बहाल करना है।
- 3. नेतन्याहू का सख्त रुख: इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने दावा किया कि हाल के हमलों से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को भारी नुकसान पहुंचा है, कई सेंट्रिफ्यूज फैक्टरियां, मिसाइल बेस और न्यूक्लियर वैज्ञानिक नष्ट किए गए। उनका कहना था कि ईरान के बचे हुए संवर्धित यूरेनियम को या तो समझौते से या फिर लड़ाई जारी रखकर हटाया जाएगा।
- 4. ईरानी स्पीकर का इमोशनल मैसेज: मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने मारे गए बच्चों की तस्वीरें लेकर पाकिस्तान पहुंचकर भावुक संदेश दिया। ईरान का आरोप है कि फरवरी के हमले में निर्दोष बच्चे शहीद हुए, जिसके लिए वह अमेरिका और इजराइल को जिम्मेदार ठहराता है।
- 5. लेबनान में हमले जारी: लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, तुफाहता इलाके में हुए हालिया हमलों में 9 लोग घायल हुए, जिनमें से 5 की हालत गंभीर बनी हुई है। क्षेत्र में तनाव अभी भी बरकरार है।
यह वार्ता 1979 की ईरानी क्रांति के बाद अमेरिका और ईरान के बीच उच्चतम स्तर की आमने-सामने की चर्चा थी, जिसमें पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। हालांकि दोनों पक्षों के बीच विश्वास की कमी और मुख्य मुद्दों (परमाणु, होर्मुज, सैंक्शंस) पर गहरी खाई के कारण कोई ब्रेकथ्रू नहीं हो सका, स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है। अमेरिका ने कहा है कि वह अपनी “रेड लाइन्स” पर अडिग रहेगा, जबकि ईरान अपनी संप्रभुता और परमाणु अधिकारों की रक्षा की बात कर रहा है। आगे क्या होता है, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।



