रिपोर्ट : @ राहुल भदौरिया – रेजिडेंट एडिटर
इस्लामाबाद : अमेरिका और ईरान के बीच छह सप्ताह से चल रहे युद्ध के बाद अब शांति की नई उम्मीद जगी है। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आज त्रिपक्षीय वार्ता शुरू हो गई है, जिसमें पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। ईरान के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात की, जबकि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भी पहुंच चुका है। पूरी दुनिया इस ऐतिहासिक वार्ता पर नजरें टिकाए हुए है, क्योंकि इससे मध्य पूर्व में स्थायी शांति की संभावना जुड़ी हुई है।
ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर ग़लीबाफ़ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची कर रहे हैं। इस टीम में ईरान के सुप्रीम नेशनल डिफेंस काउंसिल के सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं। ईरानी प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को इस्लामाबाद पहुंचा था। आज दोपहर में उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात की, जिसमें पाकिस्तान की तरफ से डिप्टी प्राइम मिनिस्टर और विदेश मंत्री मुहम्मद इशाक डार, आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस कर रहे हैं। उनके साथ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और सलाहकार कुश्नर भी शामिल हैं। वेंस ने भी शहबाज शरीफ से अलग से मुलाकात की। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने दोनों पक्षों से अलग-अलग बातचीत के बाद त्रिपक्षीय वार्ता शुरू की, जिसे कई मीडिया रिपोर्ट्स में “मेक या ब्रेक” यानी करो या मरो की स्थिति बताया जा रहा है।
युद्धविराम के बाद की स्थिति :
कुछ दिनों पहले अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता में दो सप्ताह का युद्धविराम हुआ था। अब इस युद्धविराम को स्थायी शांति समझौते में बदलने की कोशिश हो रही है। ईरान ने वार्ता से पहले कुछ शर्तें रखी हैं, जिनमें जब्त संपत्तियों की रिहाई, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा, क्षेत्रीय युद्धविराम और मुआवजे जैसे मुद्दे शामिल हैं। ईरान का कहना है कि ये शर्तें पूरी होने के बाद ही पूर्ण वार्ता आगे बढ़ेगी।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वार्ता से ठीक पहले कहा था कि अगर बातचीत सफल नहीं हुई तो अमेरिकी युद्धपोतों को हथियारों से लैस किया जा रहा है। उन्होंने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है और जरूरत पड़ने पर सख्त कदम उठाए जाएंगे। वहीं, ईरान मजबूत स्थिति में वार्ता कर रहा है और 10-पॉइंट प्रस्ताव के आधार पर अपनी मांगें पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका तक पहुंचाई हैं।
पाकिस्तान की भूमिका
पाकिस्तान इस पूरी प्रक्रिया में मध्यस्थ के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि इस्लामाबाद टॉक्स का लक्ष्य स्थायी शांति है। उन्होंने दोनों पक्षों की भागीदारी की सराहना की और कहा कि पाकिस्तान क्षेत्रीय और वैश्विक शांति के लिए अपनी भूमिका निभाता रहेगा। इस्लामाबाद में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। दो दिन का पब्लिक हॉलिडे घोषित कर सड़कों को खाली रखा गया है। प्रतिनिधिमंडल मुख्य रूप से सेरेना होटल में ठहरे हुए हैं, जहां वार्ता भी हो सकती है।
वार्ता का वैश्विक प्रभाव
यह वार्ता न केवल मध्य पूर्व बल्कि पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के तेल निर्यात का प्रमुख रास्ता है। अगर यहां तनाव बढ़ा तो वैश्विक तेल कीमतें आसमान छू सकती हैं। इजरायल पर हमलों और लेबनान में जारी स्थिति को लेकर भी बातचीत में चर्चा होने की उम्मीद है। कई विश्लेषक मान रहे हैं कि अगर ये बातचीत सफल हुई तो मध्य पूर्व में लंबे समय से चला आ रहा संकट कम हो सकता है। अभी तक कोई ठोस समझौता नहीं हुआ है, लेकिन दोनों पक्ष सतर्क आशावाद जता रहे हैं। ईरानी मीडिया ने कहा है कि वार्ता विशेषज्ञ स्तर पर पहुंच गई है। अमेरिकी अधिकारी बता रहे हैं कि कोई समझौता अभी नहीं हुआ, लेकिन बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। दुनिया भर के मीडिया इस घटनाक्रम पर लगातार नजर रखे हुए हैं। भारत समेत कई देशों की सरकारें भी इस वार्ता के नतीजे का इंतजार कर रही हैं, क्योंकि इससे क्षेत्रीय सुरक्षा और ऊर्जा बाजार पर गहरा असर पड़ सकता है। वार्ता के अगले दौर में क्या होता है, यह अगले 24 घंटों में साफ हो सकता है। पाकिस्तान की सफल मध्यस्थता से अगर स्थायी शांति का रास्ता निकलता है तो शहबाज शरीफ की सरकार को बड़ा डिप्लोमैटिक सफलता मिलेगी।



