मुंगेली, 08 सितंबर 2026। किसी गंभीर घटना में घायल व्यक्ति का बयान कई बार जांच और न्यायिक प्रक्रिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होता है। ऐसे मामलों में मृत्युकालीन कथन यानी Dying Declaration को पूरी संवेदनशीलता और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत दर्ज करना जरूरी होता है। इसी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और विधिसम्मत बनाने के उद्देश्य से मुंगेली जिले में अधिकारियों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम जिला कलेक्टोरेट स्थित “मनियारी” सभा कक्ष में आयोजित हुआ। कार्यक्रम में कलेक्टर श्री अमृत विकास तोपनो, अपर कलेक्टर श्रीमती निष्ठा पाण्डेय तिवारी और एडिशनल एसपी डॉ. प्रशांत शुक्ला मौजूद रहे। प्रशिक्षण में जिले के कार्यपालिक मजिस्ट्रेट, पुलिस अधिकारी, लोक अभियोजक और चिकित्सा अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
मृत्युकालीन कथन क्यों होता है महत्वपूर्ण?
मृत्युकालीन कथन किसी ऐसे व्यक्ति का बयान होता है जिसकी मृत्यु की आशंका वाले गंभीर मामले में उसके कथन को दर्ज किया जाता है। ऐसे बयान कई मामलों में जांच और न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं। इसलिए इसे दर्ज करते समय जल्दबाजी या लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं होती।
प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को बताया गया कि मृत्युकालीन कथन दर्ज करते समय निर्धारित प्रक्रिया और कानूनी प्रावधानों का पालन करना बेहद जरूरी है। बयान की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए पूरी प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई गई।
कानूनी प्रावधानों और SOP की दी गई जानकारी
छत्तीसगढ़ शासन और माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर के निर्देशों के अनुरूप आयोजित इस प्रशिक्षण में अधिकारियों को मृत्युकालीन कथन दर्ज करने के लिए निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) की विस्तार से जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण में प्रक्रिया से जुड़े कानूनी पहलुओं के साथ-साथ उन सावधानियों के बारे में भी बताया गया, जिन्हें बयान दर्ज करते समय ध्यान में रखना आवश्यक है। अधिकारियों को यह समझाया गया कि पूरी प्रक्रिया निर्धारित मानकों के अनुरूप होनी चाहिए, जिससे बाद में न्यायिक स्तर पर किसी तरह की परेशानी न आए।
इस दौरान उपनिदेशक लोक अभियोजन श्रीमती पुष्पा किरण भगत, जिला अभियोजन अधिकारी श्रीमती जयिता सिंह और तहसीलदार श्री अतुल वैष्णव ने अधिकारियों को आवश्यक जानकारी दी।
निष्पक्षता और पारदर्शिता पर विशेष जोर
प्रशिक्षण कार्यक्रम में मृत्युकालीन कथन की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए निष्पक्षता और पारदर्शिता को सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में शामिल किया गया। अधिकारियों को बताया गया कि ऐसे मामलों में किसी भी तरह का दबाव या पक्षपात पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकता है।
इसलिए बयान दर्ज करने से लेकर उसे संबंधित रिकॉर्ड का हिस्सा बनाने तक प्रत्येक चरण में निर्धारित प्रक्रिया का पालन जरूरी है। प्रशिक्षण का एक प्रमुख उद्देश्य अधिकारियों को इन्हीं व्यावहारिक पहलुओं से परिचित कराना रहा।
विभागों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी
मृत्युकालीन कथन से जुड़े मामलों में राजस्व, पुलिस, चिकित्सा और अभियोजन विभागों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में सभी विभागों के बीच बेहतर तालमेल होने से कार्रवाई को समय पर और सही तरीके से पूरा किया जा सकता है।
प्रशिक्षण के दौरान संबंधित अधिकारियों के बीच समन्वय मजबूत करने और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों को प्रक्रिया के दौरान आने वाली व्यावहारिक परिस्थितियों और उनसे जुड़े कानूनी पहलुओं की जानकारी दी गई।
न्यायिक प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय बनाने की कोशिश
प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य केवल अधिकारियों को नियमों की जानकारी देना नहीं था, बल्कि मृत्युकालीन कथन दर्ज करने की पूरी प्रक्रिया में एकरूपता लाना भी था। अलग-अलग विभागों के अधिकारियों को एक ही निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार काम करने की जानकारी मिलने से मामलों में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
प्रशासन की ओर से इस तरह के प्रशिक्षण को न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेष रूप से संवेदनशील मामलों में सही समय पर सही प्रक्रिया का पालन जांच और न्याय दोनों के लिए अहम होता है।
अधिकारियों की भूमिका होगी अहम
मृत्युकालीन कथन से जुड़े मामलों में अधिकारियों की जिम्मेदारी काफी महत्वपूर्ण होती है। बयान देने वाले व्यक्ति की स्थिति, मामले की गंभीरता और कानूनी प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए हर कदम सावधानी से उठाना पड़ता है।
मुंगेली में आयोजित इस प्रशिक्षण के माध्यम से अधिकारियों को कानूनी और व्यवहारिक दोनों पहलुओं की जानकारी दी गई। इससे उम्मीद है कि भविष्य में ऐसे मामलों में निर्धारित प्रक्रिया का अधिक प्रभावी तरीके से पालन किया जा सकेगा।
कुल मिलाकर, मुंगेली में आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रशासनिक और न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मृत्युकालीन कथन जैसे संवेदनशील मामलों में प्रक्रिया स्पष्ट, निष्पक्ष, समयबद्ध और कानून के अनुरूप रहे, जिससे न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता और प्रभावशीलता को मजबूत किया जा सके।



