मुंगेली, 08 सितंबर 2026। जिले में सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने और आम लोगों की यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए प्रशासन ने सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीरता दिखाई है। इसी उद्देश्य से जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक आयोजित की गई, जिसमें दुर्घटनाओं की रोकथाम, ब्लैक स्पॉट में सुधार और यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित करने जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में कलेक्टर ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सड़क दुर्घटनाओं को केवल एक विभाग की जिम्मेदारी न मानते हुए सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करना होगा। दुर्घटनाओं को कम करने के लिए संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान, जरूरी सुधार और नियमों के पालन पर लगातार निगरानी रखने की जरूरत पर जोर दिया गया।
मुंगेली सड़क सुरक्षा : ब्लैक स्पॉट में सुधार पर विशेष जोर
जिले में चिन्हित ब्लैक स्पॉट यानी ऐसे स्थान जहां बार-बार सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, उन्हें सुरक्षित बनाने पर बैठक में विशेष चर्चा हुई। अधिकारियों से इन स्थानों का निरीक्षण कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने को कहा गया।
ब्लैक स्पॉट पर सड़क की स्थिति, संकेतक, प्रकाश व्यवस्था, यातायात नियंत्रण और अन्य जरूरी सुरक्षा उपायों को बेहतर बनाने की दिशा में काम किया जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य है कि दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में समय रहते जरूरी व्यवस्थाएं की जाएं, ताकि किसी बड़े हादसे की संभावना को कम किया जा सके।
तेज रफ्तार और नियमों की अनदेखी पर कार्रवाई
सड़क दुर्घटनाओं के पीछे तेज गति से वाहन चलाना, हेलमेट का इस्तेमाल नहीं करना और सीट बेल्ट नहीं लगाना जैसे यातायात नियमों का उल्लंघन भी एक बड़ी वजह बनता है। बैठक में इन मामलों पर प्रभावी नियंत्रण को लेकर चर्चा की गई।
परिवहन विभाग को वाहनों की सुरक्षा जांच और निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही लोगों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करने के प्रयासों को भी लगातार जारी रखने पर जोर दिया गया।
दुर्घटना की स्थिति में त्वरित सहायता पर जोर
बैठक में दुर्घटना होने की स्थिति में घायलों को जल्द से जल्द प्राथमिक उपचार और सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था को प्रभावी बनाने पर भी चर्चा हुई। खासकर राष्ट्रीय राजमार्गों और दुर्घटनाजन्य क्षेत्रों में आपात स्थिति से निपटने के लिए बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
पीएम राहत योजना और प्राथमिक उपचार से संबंधित व्यवस्थाओं को मजबूत करने की जरूरत बताई गई, ताकि दुर्घटना के बाद शुरुआती समय में प्रभावित लोगों को आवश्यक सहायता मिल सके।
सड़क किनारे सामग्री और अतिक्रमण भी बड़ी चुनौती
बैठक में सड़क किनारे मिट्टी, मुरूम, रेत और गिट्टी जैसी निर्माण सामग्री रखे जाने से पैदा होने वाले जोखिम पर भी चर्चा हुई। ऐसी सामग्री के कारण सड़क की चौड़ाई कम होने और वाहनों के आवागमन में बाधा आने से दुर्घटना की आशंका बढ़ सकती है।
इसके अलावा सड़कों पर मवेशियों के विचरण और अतिक्रमण के कारण यातायात व्यवस्था प्रभावित होने के मुद्दे को भी गंभीरता से लिया गया। संबंधित विभागों को ऐसे मामलों में आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए, ताकि सड़क पर वाहनों की आवाजाही सुरक्षित और सुचारु बनी रहे।
झुके बिजली खंभों और CCTV की भी होगी निगरानी
सड़क किनारे झुके हुए विद्युत खंभे भी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। बैठक में ऐसे खंभों की पहचान कर उन्हें दुरुस्त करने की आवश्यकता पर चर्चा की गई। दुर्घटनाजन्य क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरों की स्थापना को लेकर भी विचार-विमर्श हुआ।
सीसीटीवी कैमरों की मदद से संवेदनशील स्थानों पर यातायात गतिविधियों की निगरानी बेहतर तरीके से की जा सकती है। इससे नियमों के उल्लंघन पर नजर रखने और दुर्घटनाओं के कारणों की पहचान करने में भी मदद मिल सकती है।
नियमित समीक्षा से बढ़ेगी सड़क सुरक्षा
बैठक में यह भी तय किया गया कि जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठकों का नियमित आयोजन किया जाए। पिछली बैठक में लिए गए निर्णयों और उन पर हुई कार्रवाई की समीक्षा भी की गई। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि दिए गए निर्देश केवल बैठकों तक सीमित न रहें, बल्कि जमीन पर उनका प्रभाव भी दिखाई दे।
बैठक में अतिरिक्त कलेक्टर श्रीमती निष्ठा पाण्डेय तिवारी, जिला पंचायत सीईओ श्री गोकुल रावटे, अपर कलेक्टर श्री जी.एल. यादव, मुंगेली एसडीएम श्री अजय शतरंज, लोरमी एसडीएम श्री अजीत पुजारी, पथरिया एसडीएम श्रीमती रेखा चंद्रा सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे।
कुल मिलाकर, मुंगेली प्रशासन का यह प्रयास सड़क दुर्घटनाओं को कम करने और लोगों को सुरक्षित यातायात व्यवस्था उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब जरूरत इस बात की है कि बैठक में तय किए गए निर्देशों को प्रभावी तरीके से लागू किया जाए और सड़क सुरक्षा को लेकर प्रशासन के साथ आम नागरिक भी अपनी जिम्मेदारी समझें।



