रिपोर्ट : राहुल भदौरिया – रेजीडेंट एडिटर
नई दिल्ली | प्रधानमंत्री ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम के 133वें एपिसोड में देशवासियों को संबोधित करते हुए कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बात की। इस दौरान उन्होंने विशेष रूप से चल रही जनगणना प्रक्रिया को देश का एक बेहद अहम और ऐतिहासिक अभियान बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में इस समय दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना प्रक्रिया चल रही है और हर नागरिक के लिए इसकी जानकारी होना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि इस बार जनगणना का स्वरूप पहले से काफी अलग और आधुनिक है। जिन राज्यों में स्व-गणना (सेल्फ एन्यूमरेशन) का कार्य पूरा हो चुका है, वहां अब घर-घर जाकर लिस्टिंग का काम जारी है। अब तक करीब 1 करोड़ 20 लाख घरों का डेटा एकत्र किया जा चुका है, जो इस अभियान की तेज गति को दर्शाता है।
प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि इस बार नागरिकों की भागीदारी को आसान बनाने के लिए डिजिटल सुविधाएं दी गई हैं। लोग स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं। जनगणना कर्मचारी के घर आने से लगभग 15 दिन पहले यह सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। प्रक्रिया पूरी होने पर नागरिकों को एक विशेष पहचान संख्या (आईडी) मिलती है, जिसे बाद में सत्यापन के लिए दिखाया जा सकता है। इससे समय की बचत होती है और दोबारा जानकारी देने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने आगामी का भी जिक्र किया और देशवासियों को अग्रिम शुभकामनाएं दीं। उन्होंने के जीवन और उनके संदेशों को आज के समय में भी प्रासंगिक बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि शांति की शुरुआत स्वयं से होती है और आत्म-नियंत्रण ही सबसे बड़ी जीत है। पर्यावरण संरक्षण पर बात करते हुए उन्होंने गुजरात के कच्छ क्षेत्र का उदाहरण दिया, जहां हर साल बड़ी संख्या में फ्लेमिंगो पक्षी आते हैं और पूरे क्षेत्र को गुलाबी रंग में रंग देते हैं। स्थानीय लोग इन्हें “लाखा जी के बाराती” कहते हैं, जो अब पर्यावरण संरक्षण का एक सुंदर प्रतीक बन चुके हैं।
ऊर्जा क्षेत्र में भारत की प्रगति का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पवन ऊर्जा के क्षेत्र में देश तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत की कुल पवन ऊर्जा क्षमता अब 56 गीगावॉट से अधिक हो चुकी है और पिछले एक वर्ष में ही लगभग 6 गीगावॉट की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि गुजरात, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे राज्य इस क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।
इसके अलावा, प्रधानमंत्री ने पूर्वोत्तर भारत में बांस उद्योग के विकास का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में कानून में बदलाव कर बांस को पेड़ की श्रेणी से बाहर किया गया, जिससे इस क्षेत्र में नए अवसर पैदा हुए। आज पूर्वोत्तर में बांस आधारित उद्योग तेजी से फल-फूल रहा है और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए रास्ते खुल रहे हैं। प्रधानमंत्री ने अंत में कहा कि जनभागीदारी, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के माध्यम से भारत एक मजबूत और आत्मनिर्भर राष्ट्र की ओर तेजी से बढ़ रहा है।



