मध्य-पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने दावा किया है कि उसने ऑपरेशन “True Promise-4” के 19वें चरण के तहत इज़रायल पर भारी मिसाइल हमला किया। इस हमले में ईरान की ताकतवर मानी जाने वाली खोर्रमशहर-4 बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया, जिनमें लगभग 1 टन वॉरहेड ले जाने की क्षमता बताई जाती है। ईरान का दावा है कि इन मिसाइलों ने इज़रायल की 7-लेयर एयर डिफेंस सिस्टम को पार करते हुए सीधे तेल अवीव के अहम सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये मिसाइलें तेल अवीव के बीचों-बीच, बेन गुरियन एयरपोर्ट और इज़रायली एयर फोर्स के 27वें स्क्वाड्रन बेस के आसपास गिरीं। अगर यह दावा सही साबित होता है, तो यह इज़रायल की सुरक्षा प्रणाली के लिए एक बड़ा झटका माना जा सकता है। इज़रायल का एयर डिफेंस सिस्टम दुनिया के सबसे मजबूत सुरक्षा कवचों में गिना जाता है, जिसमें Iron Dome, David’s Sling और Arrow सिस्टम जैसी कई आधुनिक तकनीकें शामिल हैं। इन सभी को मिलाकर एक बहुस्तरीय यानी 7 लेयर एयर डिफेंस बनाया गया है, जिसे भेद पाना बेहद मुश्किल माना जाता है।
ईरान ने यह भी कहा है कि ऑपरेशन के 18वें चरण में उसने बहरीन, यूएई और कुवैत में मौजूद अमेरिका के करीब 20 सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया था। इससे साफ संकेत मिलते हैं कि यह टकराव अब केवल ईरान और इज़रायल तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि पूरे मध्य-पूर्व में बड़े सैन्य संघर्ष का रूप ले सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक खोर्रमशहर-4 मिसाइल ईरान की सबसे घातक लंबी दूरी की मिसाइलों में से एक है। इसकी रेंज लगभग 2000 किलोमीटर बताई जाती है और भारी वॉरहेड के कारण यह बड़े सैन्य अड्डों और इंफ्रास्ट्रक्चर को गंभीर नुकसान पहुंचाने में सक्षम मानी जाती है।
मध्य-पूर्व में तेजी से बढ़ते इस तनाव ने दुनिया भर की चिंताएं बढ़ा दी हैं। अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस बात पर है कि इज़रायल और उसके सहयोगी देश इस हमले का क्या जवाब देते हैं। अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो यह टकराव क्षेत्रीय ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर के संकट में भी बदल सकता है।



