रिपोर्ट : राहुल भदौरिया – रेजीडेंट एडिटर – FM NEWS
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार शाम 8:30 बजे राष्ट्र के नाम संबोधन में महिला आरक्षण बिल को सदन में पास न करा पाने पर देश की महिलाओं से माफी मांगी। उन्होंने विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके और सपा जैसे दलों ने स्वार्थी राजनीति करते हुए देश की आधी आबादी के अधिकारों को छीन लिया है। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा, “इस बिल में जरूरी संशोधन नहीं हो पाया। मैं सभी माताओं और बहनों से माफी मांगता हूं। मेरे लिए देशहित हमेशा सर्वोपरि रहा है, लेकिन जब कुछ लोगों के लिए दल-हित देश-हित से बड़ा हो जाता है, तो नारी शक्ति को इसका खामियाजा उठाना पड़ता है।”
प्रधानमंत्री ने विपक्ष को ‘भ्रूणहत्या’ करने वाला बताया और कहा कि इन दलों ने न सिर्फ महिला आरक्षण बिल को रोका, बल्कि संविधान की भावनाओं का भी अपमान किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने सदन में इस बिल की ‘भ्रूणहत्या’ कर दी। पीएम मोदी ने कहा कि यह बिल 40 साल से लंबित महिलाओं के अधिकार को 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले लागू करने का ईमानदार प्रयास था, लेकिन विपक्ष ने इसे रोक दिया।
मोदी ने आगे कहा, “कांग्रेस ने अपना मुखौटा उतार दिया है। पूरा विपक्ष इस भ्रूणहत्या का गुनहगार है। ये देश के संविधान के अपराधी हैं और नारी शक्ति के अपराधी हैं।” उन्होंने बताया कि बिल नए अवसर, नई उड़ान और बाधाएं हटाने का महायज्ञ था, जो उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम सभी राज्यों की महिलाओं को समान अनुपात में प्रतिनिधित्व देने का प्रयास था। पीएम ने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने महिलाओं से उनका अधिकार छीनकर मेज थपथपाई, जो नारी के स्वाभिमान पर चोट थी। “नारी सब भूल जाती है, लेकिन अपमान नहीं भूलती। जब देश की महिलाएं इन नेताओं को देखेंगी, तो याद रखेंगी कि इन्होंने महिला आरक्षण रोकने का जश्न मनाया था।”
उन्होंने कहा कि 21वीं सदी की नारी सब देख रही है और विपक्ष को इस पाप की सजा जरूर मिलेगी। पीएम मोदी ने माना कि सदन में बिल गिरने से उन्हें भी दुख हुआ, जबकि कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी और सपा जैसी परिवारवादी पार्टियां खुशी से तालियां बजा रही थीं। इससे पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पीएम मोदी पर हमला बोलते हुए कहा था कि वे झूठ का जाल बुनेंगे। ममता ने दावा किया कि महिला आरक्षण बिल देश को बांटने के लिए लाया गया था और परिसीमन के जरिए भाजपा राजनीतिक फायदा उठाना चाहती थी। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने देश की एकता बनाए रखने के लिए इसका विरोध किया।
बता दें कि यह मोदी सरकार के 12 साल के शासन में पहला मौका था जब कोई बिल सदन में पास नहीं हो सका। सरकार तीन बिल लेकर आई थी, जिनमें महिला आरक्षण को 2029 से पहले लागू करने के लिए 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन का प्रावधान था। हालांकि, सरकार ने परिसीमन संशोधन संविधान बिल 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल 2026 को वोटिंग के लिए पेश ही नहीं किया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि ये दोनों बिल पहले बिल से जुड़े हैं, इसलिए अलग वोटिंग की जरूरत नहीं है। महिला आरक्षण बिल पास न होने से अब नई जनगणना के बाद ही परिसीमन संभव होगा, जिसके चलते 2029 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं को 33% आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाएगा। इस घटनाक्रम ने संसद में तीखी बहस और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को जन्म दिया है।
प्रधानमंत्री के संबोधन में महिलाओं के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए उन्होंने कहा कि नारी शक्ति को सशक्त बनाने का उनका संकल्प अटूट है और भविष्य में भी इस दिशा में हर संभव प्रयास किए जाएंगे। वहीं, विपक्षी दलों ने सरकार पर आरोप लगाया है कि उन्होंने बिल को जानबूझकर ऐसे तरीके से पेश किया जिससे वह पास न हो सके। देश भर में महिला संगठनों और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है। कई महिला अधिकार कार्यकर्ता सरकार और विपक्ष दोनों से जवाब मांग रहे हैं कि आखिर कब तक महिलाओं का यह अधिकार लटकता रहेगा।



