महाभारत में संजय को दिव्य दृष्टि प्राप्त थी। वह हस्तिनापुर में बैठे धृतराष्ट्र को युद्धभूमि में घट रही घटनाओं का आंखों देखा हाल सुनाते थे। समय बदला, तकनीक बदली और आज दूरदर्शन से लेकर सैकड़ों न्यूज चैनल तक मौजूद हैं। राजनीति में भी अब नेता आमने-सामने बैठकर अपनी बात जनता तक पहुंचाने के लिए टीवी डिबेट का सहारा लेते हैं।
छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा रायपुर प्रेस क्लब में आमने-सामने बैठे। करीब 80 मिनट तक चली इस बहस में दोनों नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर अपने-अपने आंकड़े और तर्क सामने रखे।
प्रधानमंत्री आवास योजना : 18 लाख आवास का मुद्दा बना बहस का केंद्र
प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति में लंबे समय से आरोप-प्रत्यारोप चल रहे हैं। इसी सिलसिले में भूपेश बघेल ने विजय शर्मा को सार्वजनिक बहस की चुनौती दी थी। विजय शर्मा ने चुनौती स्वीकार की और फिर रायपुर प्रेस क्लब में दोनों नेता एक मंच पर दिखाई दिए।
बहस में विजय शर्मा ने दावा किया कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में 11.75 लाख से ज्यादा प्रधानमंत्री आवास पूरे किए जा चुके हैं। उन्होंने कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में करीब तीन लाख आवास पूरे होने का भी दावा किया। शर्मा ने यह भी कहा कि भाजपा सरकार ने सत्ता में आने के बाद अपनी पहली कैबिनेट में 18 लाख आवास से जुड़े फैसले किए थे।
वहीं भूपेश बघेल ने इन आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब 18 लाख आवास की बात की गई थी तो बाकी मकानों का क्या हुआ। उन्होंने केंद्र से अलग-अलग समय पर मिली स्वीकृतियों और राज्य सरकार के दावों को लेकर भी सवाल खड़े किए।

आंकड़ों की अलग-अलग व्याख्या से बढ़ा विवाद
इस पूरी बहस का सबसे अहम पहलू यही रहा कि दोनों पक्षों ने प्रधानमंत्री आवास योजना के आंकड़ों को अलग-अलग तरीके से सामने रखा। कहीं स्वीकृत आवास की संख्या की बात हुई तो कहीं निर्माण पूरा होने वाले मकानों की।
यही वजह है कि 18 लाख, 28 लाख और इससे भी बड़े आंकड़ों को लेकर बहस और पेचीदा होती गई। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक जुलाई 2026 तक छत्तीसगढ़ के लिए कुल लक्ष्य 26,42,224, राज्य द्वारा स्वीकृत आवास 24,51,294 और पूर्ण आवास 20,16,970 बताए गए थे। हालांकि बाद में अतिरिक्त आवास की घोषणाएं भी हुईं। इसलिए अलग-अलग तारीख और श्रेणी के आंकड़ों को एक साथ रखकर देखने से भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।
भूपेश बघेल ने केंद्र के दावों पर भी उठाए सवाल
बहस के दौरान भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार की ओर से अलग-अलग समय पर प्रधानमंत्री आवास को लेकर की गई घोषणाओं का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सवाल किया कि यदि अतिरिक्त आवासों की स्वीकृति दी गई है तो उनका वास्तविक निर्माण और लाभार्थियों तक उनका लाभ पहुंचने की स्थिति क्या है।
दूसरी ओर विजय शर्मा ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठाए। उनका आरोप रहा कि कांग्रेस सरकार के समय योजना से जुड़े काम की गति पर्याप्त नहीं थी। दोनों नेताओं ने अपने-अपने पक्ष में आंकड़े पेश किए, लेकिन आंकड़ों की परिभाषा और अवधि अलग होने के कारण बहस का एक बड़ा हिस्सा इसी पर केंद्रित रहा।

टीएस सिंहदेव का पुराना बयान भी चर्चा में
इस विवाद के बीच पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री रहे टीएस सिंहदेव की भूमिका और उनके पुराने बयानों का भी संदर्भ सामने आता है। सिंहदेव ने अपने इस्तीफे के समय यह कहा था कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग उनके पास होने के बावजूद उनकी बात नहीं सुनी जा रही थी।
ऐसे में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर कांग्रेस सरकार के कार्यकाल की जिम्मेदारी और निर्णय प्रक्रिया पर भी सवाल उठते रहे हैं। हालांकि योजना के आंकड़ों और उस समय की प्रशासनिक प्रक्रिया को समझने के लिए अलग-अलग वर्षों के आधिकारिक रिकॉर्ड को साथ देखना जरूरी है।
डिबेट के बाद सोशल मीडिया पर भी सियासी वार
प्रेस क्लब की बहस खत्म होने के बाद मामला सिर्फ मंच तक सीमित नहीं रहा। दोनों दलों के नेताओं और समर्थकों की ओर से सोशल मीडिया पर एक-दूसरे पर टिप्पणियां की गईं। भूपेश बघेल ने भी बहस के बाद सोशल मीडिया पर विजय शर्मा को लेकर तंज किया। वहीं भाजपा और कांग्रेस के सोशल मीडिया हैंडल से भी एक-दूसरे के दावों पर सवाल उठाए गए।
बहस के दौरान प्रेस क्लब के बाहर दोनों दलों के समर्थकों के बीच भी विवाद की स्थिति बनी और पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।

असली सवाल आंकड़ों से आगे का
प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी जनकल्याणकारी योजना में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि कितने परिवारों को स्वीकृति मिली, कितने लाभार्थियों को राशि मिली और कितने मकानों का निर्माण वास्तव में पूरा हुआ। राजनीतिक मंच पर आंकड़ों को लेकर बहस जारी रह सकती है, लेकिन अंतिम तस्वीर आधिकारिक रिकॉर्ड और जमीन पर योजना के क्रियान्वयन से ही साफ होगी।
भूपेश बघेल और विजय शर्मा की बहस ने कम से कम इतना जरूर स्पष्ट कर दिया कि प्रधानमंत्री आवास योजना आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ की राजनीति का अहम मुद्दा बनी रह सकती है। अब दोनों पक्षों के दावों के बीच जनता के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि आंकड़ों की इस जंग में वास्तविक लाभार्थियों तक योजना का कितना लाभ पहुंचा।



