मुंगेली जिले में शासकीय राशि से जुड़े अनधिकृत लेन-देन के मामले में सिटी कोतवाली पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक बैंक लिपिक को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, पर्यावरण अधोसंरचना विकास मद के शासकीय बैंक खाते से अलग-अलग खातों में कुल 26 लाख 87 हजार रुपये का अनधिकृत अंतरण किया गया था। मामले में गिरफ्तार आरोपी की पहचान टिकेश कुमार के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपी को न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।
यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल के निर्देशन में की गई। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने बैंकिंग रिकॉर्ड, ट्रांजेक्शन विवरण और संबंधित दस्तावेजों की जांच की। पुलिस का कहना है कि जांच में आरोपी की भूमिका प्रथम दृष्टया सामने आने के बाद उसके खिलाफ कार्रवाई की गई है।
मुंगेली में 26.87 लाख का अनधिकृत लेन-देन : कलेक्टर के निर्देश पर शुरू हुई जांच
पुलिस के अनुसार, 7 अगस्त 2026 को कलेक्टर जिला मुंगेली के आदेश के आधार पर पर्यावरण अधोसंरचना विकास मद से जुड़े शासकीय बैंक खाते में हुए अनधिकृत लेन-देन की जांच कर प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश मिले थे।
इसके बाद सिटी कोतवाली मुंगेली पुलिस ने उपलब्ध दस्तावेजों और प्रारंभिक जानकारी की जांच की। जांच के बाद अपराध क्रमांक 253/2026 दर्ज कर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) के तहत मामला पंजीबद्ध किया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल ने बैंकिंग रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की बारीकी से जांच करने के निर्देश दिए। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. प्रशांत शुक्ला और पुलिस अनुविभागीय अधिकारी आशीष अरोरा के मार्गदर्शन में पुलिस टीम ने जांच आगे बढ़ाई।

सात बार हुआ अनधिकृत ट्रांजेक्शन
विवेचना के दौरान पुलिस को पता चला कि 30 सितंबर 2025 से 8 अक्टूबर 2025 के बीच संबंधित शासकीय खाते से सात बार अनधिकृत लेन-देन किए गए थे। इन ट्रांजेक्शन के माध्यम से कुल 26.87 लाख रुपये की राशि का आहरण और दोबारा जमा किए जाने से जुड़े लेन-देन सामने आए।
पुलिस के अनुसार, 30 सितंबर 2025 को शासकीय खाते से आरोपी के व्यक्तिगत बैंक खाते में 8.50 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए। इसके बाद 1 अक्टूबर 2025 को मंजुलता पटेल के बैंक खाते में क्रमशः 9.19 लाख रुपये और 9.18 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए। इस तरह कुल राशि 26.87 लाख रुपये बताई गई है।
पुलिस के मुताबिक, इसमें से 1.61 लाख रुपये अतिरिक्त राशि होने के कारण वापस शासकीय खाते में जमा हो गए थे।
बैंक लिपिक के तौर पर संभालता था कई जिम्मेदारियां
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी टिकेश कुमार 29 अगस्त 2022 से 27 जनवरी 2026 तक सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की मुंगेली शाखा में लिपिक के पद पर कार्यरत था।
पुलिस के अनुसार, आरोपी को बैंक में ग्राहक केवाईसी, मोबाइल नंबर लिंकिंग, खाता संचालन, एनईएफटी, आरटीजीएस और राशि अंतरण जैसे बैंकिंग कार्यों की जिम्मेदारी दी गई थी। पुलिस का कहना है कि बैंक मैनेजर के निर्देश पर पर्यावरण अधोसंरचना विकास मद से जुड़े बंद शासकीय खाते को दोबारा सक्रिय कराया गया था।
जांच के दौरान पुलिस ने संबंधित बैंक खातों, लेन-देन के रिकॉर्ड, सीबीएस प्रणाली में उपलब्ध विवरण और अन्य दस्तावेजों का परीक्षण किया।
बैंक मैनेजर के अप्रूवल का भी किया गया जिक्र
पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में आरोपी ने शासकीय खाते से राशि ट्रांसफर किए जाने के संबंध में बैंक मैनेजर के अप्रूवल के बाद सीबीएस प्रणाली के माध्यम से लेन-देन किए जाने की बात कही है। पुलिस ने इस संबंध में उपलब्ध बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों का भी परीक्षण किया है।
जांच में आरोपी की भूमिका प्रथम दृष्टया सामने आने के बाद उसके खिलाफ BNS की धारा 316(5) भी जोड़ी गई। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के आधार पर पुलिस ने टिकेश कुमार को 23 सितंबर 2026 को गिरफ्तार किया।

न्यायिक रिमांड पर भेजा गया आरोपी
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को 24 सितंबर 2026 को न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। न्यायालय के आदेश के बाद उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है। पुलिस ने बताया कि मामले में आगे की विवेचना अभी जारी है और जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस कार्रवाई में थाना सिटी कोतवाली से निरीक्षक कार्तिकेश्वर जांगड़े, सहायक उपनिरीक्षक ईश्वर सिंह राजपूत तथा आरक्षक विकास ठाकुर, योगेश यादव और मनोज टंडन की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
पुलिस अब मामले से जुड़े बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे लेन-देन की जांच कर रही है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि इस मामले में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं। फिलहाल आरोपी न्यायिक रिमांड पर है और प्रकरण की विवेचना जारी है।



