छुईखदान। ग्राम पंचायत दनिया में नल कनेक्शन और जलकर भुगतान को लेकर सामने आए विवाद में अब पंचायत ने अपना पक्ष सामने रखा है। पंचायत ने प्रकाशित समाचार में किए गए दावों को तथ्यहीन और भ्रामक बताते हुए संबंधित व्यक्ति से दावों के समर्थन में जरूरी दस्तावेज मांगे हैं। इसके लिए सात दिनों की समय सीमा तय की गई है।
ग्राम पंचायत दनिया, जनपद पंचायत छुईखदान की ओर से रायपुर निवासी अश्वनी कुमार निर्मलकर को 24 सितंबर 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। नोटिस क्रमांक 01-09/ग्रा.पं./2026 के माध्यम से पंचायत ने नल कनेक्शन की अनुमति और जलकर भुगतान से जुड़े अभिलेख प्रस्तुत करने को कहा है।
नल कनेक्शन और जलकर भुगतान : पंचायत के रिकॉर्ड में नहीं मिला कनेक्शन और भुगतान का प्रमाण
पंचायत के अनुसार, उपलब्ध अभिलेखों की प्रारंभिक जांच में संबंधित नल कनेक्शन के लिए जारी अनुमति या स्वीकृति और निर्धारित जलकर अथवा जल प्रभार के भुगतान का रिकॉर्ड प्रथमदृष्टया उपलब्ध नहीं है।
पंचायत को जानकारी मिली है कि अश्वनी कुमार निर्मलकर या उनके पिता धीराजी राम, निवासी दनिया, द्वारा पंचायत की जलापूर्ति व्यवस्था से नल कनेक्शन लिया गया है या उसका उपयोग किया जा रहा है। साथ ही संबंधित पक्ष की ओर से कनेक्शन की अनुमति और जलकर भुगतान किए जाने का दावा भी सामने आया है।
इन्हीं दावों की पुष्टि के लिए पंचायत ने दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा है। पंचायत का कहना है कि नल कनेक्शन और भुगतान की स्थिति रिकॉर्ड के आधार पर ही स्पष्ट की जाएगी।

इन दस्तावेजों की पंचायत ने की मांग
ग्राम पंचायत ने संबंधित व्यक्ति से नल कनेक्शन के लिए किए गए आवेदन की प्रति, कनेक्शन की अनुमति या स्वीकृति और जलकर अथवा जल प्रभार की रसीद मांगी है। इसके अलावा कनेक्शन शुल्क के भुगतान की मूल रसीद या प्रमाणित प्रति भी प्रस्तुत करने को कहा गया है।
यदि नल कनेक्शन के लिए किसी अन्य विभाग से अनुमति ली गई है तो उसका प्रमाण भी पंचायत के सामने रखने को कहा गया है। इन दस्तावेजों के आधार पर पंचायत यह जांच करेगी कि संबंधित कनेक्शन नियमानुसार लिया गया था या नहीं और उसके लिए निर्धारित भुगतान किया गया है या नहीं।
प्रकाशित समाचार को लेकर भी मांगा गया स्पष्टीकरण
पंचायत ने अपने नोटिस में इस मामले को लेकर प्रकाशित समाचार का भी उल्लेख किया है। पंचायत का कहना है कि समाचार में नल कनेक्शन की अनुमति और जलकर भुगतान संबंधी दावों का उल्लेख किया गया था।
पंचायत ने कहा है कि केवल किसी व्यक्ति के दावा करने से अनुमति या भुगतान को पंचायत के अभिलेखों में प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। इसलिए संबंधित व्यक्ति को अपने दावों के समर्थन में दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया है।
पंचायत ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति को पहले से दोषी ठहराना नहीं है। उसका कहना है कि जलापूर्ति व्यवस्था से जुड़ी वास्तविक स्थिति दस्तावेजों और पंचायत रिकॉर्ड के आधार पर ही सामने आनी चाहिए।
सरपंच मंगलू राम साहू ने किया समाचार का खंडन
ग्राम पंचायत दनिया के सरपंच मंगलू राम साहू ने प्रकाशित समाचार में पंचायत के संबंध में प्रस्तुत किए गए तथ्यों का खंडन किया है। पंचायत का कहना है कि उपलब्ध अभिलेखों की स्थिति को ध्यान में रखे बिना लगाए गए दावों से मामले की पूरी तस्वीर सामने नहीं आती।
पंचायत ने समाचार माध्यम से आग्रह किया है कि इस मामले में पंचायत का पक्ष और उपलब्ध अभिलेखों की स्थिति भी ग्रामीणों के सामने रखी जाए। पंचायत के मुताबिक, इससे गांव में किसी तरह का भ्रम पैदा होने से बचाया जा सकता है।
सात दिन में जवाब नहीं मिला तो होगी आगे की कार्रवाई
कारण बताओ नोटिस के अनुसार संबंधित व्यक्ति को सात दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण और मांगे गए दस्तावेज प्रस्तुत करने हैं। अगर निर्धारित समय में जवाब या अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए जाते हैं तो पंचायत उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई कर सकती है।
यदि जांच में नल कनेक्शन अनधिकृत पाया जाता है तो जलापूर्ति से जुड़े नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इसके साथ ही यदि जलकर या जल प्रभार बकाया पाया जाता है तो उसकी वसूली की प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है।
हालांकि पंचायत ने साफ किया है कि नोटिस को अंतिम निर्णय नहीं माना जाना चाहिए। संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया है। उसके जवाब और दस्तावेज मिलने के बाद पंचायत उनका परीक्षण करेगी और उसके बाद ही मामले में अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
घर तोड़ने के आरोपों पर भी पंचायत ने रखा पक्ष
मामले में संबंधित पक्ष की ओर से घर तोड़ने और जानबूझकर परेशान करने के आरोप लगाए जाने की बात भी सामने आई है। पंचायत ने इन आरोपों को गलत बताया है।
पंचायत के अनुसार, किसी व्यक्ति के आवास को व्यक्तिगत द्वेष के कारण तोड़ने की कार्रवाई नहीं की जा रही है। पंचायत का कहना है कि कार्रवाई शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की प्रक्रिया के तहत की जा रही है और इसके लिए नियमानुसार नोटिस जारी किया गया है।
पंचायत ने कहा है कि अतिक्रमण संबंधी कार्रवाई को व्यक्तिगत विवाद के तौर पर पेश करना उचित नहीं है। शासकीय भूमि की स्थिति और ग्रामीणों के निस्तार को ध्यान में रखते हुए नियमों के अनुसार कार्रवाई करना पंचायत की प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
फिलहाल इस पूरे मामले में पंचायत के नोटिस के बाद संबंधित पक्ष के जवाब और दस्तावेजों का इंतजार है। दस्तावेज सामने आने और उनके परीक्षण के बाद ही नल कनेक्शन, जलकर भुगतान और अतिक्रमण से जुड़े विवाद की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।



