PAHALGAM ATTACK AFTER ONE YEAR : एक साल पहले कश्मीर के पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण आतंकी हमले की याद आज भी देश के दिल में ताजा है। उस दर्दनाक घटना में 26 निर्दोष सैलानियों की जान चली गई थी, जिनमें कानपुर के युवक शुभम द्विवेदी भी शामिल थे। ऐसे में शुभम के परिवार की ओर से हमले की पहली बरसी पर कानपुर में ‘एक शाम पहलगाम के शहीदों के नाम’ से एक कार्यक्रम का आयोजन कर उन सभी 26 सैलानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करने का काम किया ।
इस दौरान कानपुर के सैलानी शुभम द्विवेदी की पत्नी ऐशान्यां ने FM News से विशेष बातचीत में अपने दर्द और संघर्ष को साझा किया। उन्होंने कहा विवाह के महज दो महीने बाद ही इस त्रासदी ने उनकी पूरी जिंदगी को 360 डिग्री मोड़ दिया। रुंधे गले से उन्होंने बताया, “शादी के बाद खुशियों और सपनों का समय होता है, लेकिन एक पल में सब कुछ बदल गया। आज मैं केवल शुभम के और अपने माता-पिता के लिए जी रही हूँ।”
ऐशान्यां ने सरकार से एक अनोखी और मजबूत माँग की है। उन्होंने कहा कि पहलगाम हमला सामान्य आतंकी हमला नहीं था। आतंकियों ने वहाँ मौजूद लोगों से उनकी “जाति और धर्म” पूछकर उन्हें निशाना बनाया था, हिन्दू बताते ही उन्हें दर्दनाक मौत दी, इसके साथ प्रधानमंत्री को चुनौती देते हुए किए गए इस हमले को उन्होंने बलिदान करार दिया। उन्होंने इस धटना के बाद सेना के शौर्य की भी तारीफ की उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर से हम सभी 26 परिवारों के साथ देश का सीना गर्व से चौड़ा हुआ है । लेकिन अभी भी ये ज़ख्म भरे नही है ।
ऐशान्यां का कहना है, “जब किसी को उसके धर्म के आधार पर मारा जाए, तो वह शहादत है। मैं माँग करती हूँ कि उन सभी 26 निर्दोषों को ‘शहीद’ का दर्जा और राष्ट्रीय सम्मान दिया जाए। इससे पाकिस्तान और आतंकी ताकतों को साफ संदेश जाएगा कि भारत अपने नागरिकों के बलिदान को कभी व्यर्थ नहीं जाने देगा।” बातचीत के दौरान ऐशान्यां ने स्थानीय प्रशासन और यूपी विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना का आभार जताया, उन्होंने कहा सतीश महाना द्वारा शुभम की याद में एक द्वार का निर्माण कराया गया ये शुभम के लिए एक श्रद्धांजलि ही है । इसके साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने की इच्छा भी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वे मुख्यमंत्री को धन्यवाद देना चाहती हैं कि उनके नेतृत्व में जो उत्तर प्रदेश में सुरक्षा का माहौल बना हुआ है। एक बेटी के नाते वे अपना दर्द उनसे साझा करना चाहती हैं।
आगे ऐशान्यां ने कहा कि वे इस घटना को कभी भी देशवासियों को भूलने नहीं देंगी, पहलगाम हमला उन 26 परिवारों के लिए कभी न भरने वाला घाव है, लेकिन ऐशान्यां जैसी बहादुर महिलाएँ इस दर्द को राष्ट्र की एकता और मजबूती में बदलने का प्रयास कर रही हैं। उनकी आवाज न सिर्फ कानपुर की, बल्कि पूरे देश की आवाज बन चुकी है जो कहती है आतंकवाद कभी स्वीकार्य नहीं, बलिदान कभी व्यर्थ नहीं।
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