INTERMEDIATE RESULT 2026 कानपुर का बहुचर्चित बिकरू कांड, जिसने साल 2020 में पूरे देश को झकझोर दिया था, एक बार फिर चर्चा में है—लेकिन इस बार वजह अपराध नहीं, बल्कि संघर्ष और सफलता की कहानी है। इस मामले में नाम आने वाली खुशी दुबे ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद यूपी बोर्ड की इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 में फर्स्ट डिवीजन हासिल कर एक नई मिसाल पेश की है। उन्होंने 61 प्रतिशत अंक प्राप्त कर यह साबित कर दिया कि हालात कितने भी विपरीत क्यों न हों, अगर इरादा मजबूत हो तो मंजिल जरूर मिलती है।
बिकरू कांड के बाद खुशी दुबे को गंभीर आरोपों का सामना करना पड़ा और उन्हें करीब 30 महीने जेल में रहना पड़ा। जेल की सख्त और सीमित जिंदगी के बीच भी उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी। यही नहीं, रिहाई के बाद भी कोर्ट-कचहरी के लगातार चक्कर, पारिवारिक समस्याएं और मानसिक दबाव के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं हटने दिया।
खुशी बताती हैं कि उनकी यह सफलता आसान नहीं थी। एक ओर कानूनी लड़ाई चल रही थी, वहीं दूसरी ओर मां की खराब तबीयत ने उन्हें मानसिक रूप से काफी प्रभावित किया। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और पढ़ाई को अपनी प्राथमिकता बनाए रखा। उनका कहना है कि मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास ही उनकी सबसे बड़ी ताकत रहे। अगर विषयवार अंकों की बात करें तो ख़ुशी ने समाजशास्त्र में 75, नागरिक शास्त्र में 73 और हिंदी में 66 अंक हासिल किए, जो उनके समर्पण को दर्शाता है। परिवार के अनुसार, मुश्किल हालातों के बावजूद खुशी ने कभी पढ़ाई से समझौता नहीं किया।
खुशी दुबे का सपना अब कानून की पढ़ाई कर एक सफल वकील बनने का है। उनका मानना है कि न्याय व्यवस्था के माध्यम से वे समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं और उन लोगों की मदद कर सकती हैं, जो अन्याय का सामना कर रहे हैं। यह कहानी सिर्फ एक छात्रा की सफलता नहीं, बल्कि उन सभी के लिए प्रेरणा है जो मुश्किल परिस्थितियों से जूझ रहे हैं। खुशी दुबे ने यह दिखा दिया कि अगर इंसान ठान ले, तो हालात उसकी राह नहीं रोक सकते।



