कानपुर। जाजमऊ की गंगा रविवार सुबह एक ऐसी घटना की गवाह बनी, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। जिस मगरमच्छ को गंगा का सबसे खतरनाक शिकारी माना जाता है, वही इस बार संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिला। मक्कू शहीद के भट्ट के पास गंगा किनारे करीब चार से पांच फीट लंबे मगरमच्छ का शव मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि मगरमच्छ का सिर बुरी तरह क्षतिग्रस्त था, खोपड़ी टूटी हुई थी और शरीर पर कई गंभीर चोटों के निशान मौजूद थे। यह नजारा देखने वालों के मन में एक ही सवाल उठ रहा था—क्या गंगा का यह शिकारी किसी हादसे का शिकार हुआ या फिर इंसानी लालच ने उसकी जान ले ली?
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रविवार सुबह करीब छह बजे मोहल्ले के कुछ बच्चे गंगा किनारे क्रिकेट खेल रहे थे। खेल के दौरान गेंद नदी की ओर चली गई। बच्चे गेंद लेने के लिए किनारे पहुंचे तो उनकी नजर रेत पर पड़े मगरमच्छ के शव पर पड़ी। पहले तो बच्चों को लगा कि शायद मगरमच्छ जिंदा है, लेकिन जब कोई हलचल नहीं हुई तो उन्होंने शोर मचा दिया। कुछ ही मिनटों में आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए और देखते ही देखते सैकड़ों लोगों की भीड़ गंगा किनारे जमा हो गई। स्थानीय लोगों ने जब मगरमच्छ की हालत देखी तो मामला और भी रहस्यमय हो गया। मगरमच्छ के सिर की हड्डी टूटी हुई थी और ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो किसी भारी वस्तु से उस पर कई बार वार किया गया हो। शरीर पर भी चोटों के निशान मिले। इन हालात ने लोगों के मन में आशंका पैदा कर दी कि यह सामान्य मौत नहीं हो सकती।
इलाके के लोगों का आरोप है कि गंगा में लंबे समय से अवैध तरीके से मछलियों का शिकार किया जा रहा है। उनका कहना है कि रात के अंधेरे में नदी में जाल डाले जाते हैं, जिनमें कई बार जलीय जीव भी फंस जाते हैं। लोगों का अंदेशा है कि यह मगरमच्छ भी ऐसे ही किसी जाल में फंस गया होगा। इसके बाद अवैध शिकार करने वालों ने उसे बचाने के बजाय अपने बचाव के लिए उसके सिर पर हमला कर दिया। हालांकि, इस आशंका की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच पूरी होने के बाद ही मौत की वास्तविक वजह सामने आएगी।
घटना के बाद क्षेत्रवासियों में भारी नाराजगी देखने को मिली। लोगों का कहना है कि गंगा में अवैध शिकार की शिकायतें पहले भी कई बार की गईं, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि यदि समय रहते सख्ती बरती जाती तो शायद यह दुर्लभ वन्यजीव आज जिंदा होता। स्थानीय नागरिकों ने वन विभाग और प्रशासन से मांग की है कि गंगा में अवैध शिकार करने वालों के खिलाफ विशेष अभियान चलाकर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
मामले की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और वन विभाग को अवगत कराया गया। थाना प्रभारी संजय पांडेय ने बताया कि वन विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर पूरे मामले की जांच करेगी। मगरमच्छ के शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा, जिससे मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सके। यदि जांच में किसी प्रकार की मानवजनित हिंसा या अवैध शिकार की पुष्टि होती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल गंगा किनारे मिले इस मगरमच्छ की मौत कई सवाल छोड़ गई है। क्या यह महज एक हादसा था, या फिर अवैध शिकार के काले कारोबार ने गंगा के एक और बेजुबान प्रहरी की जान ले ली? इस सवाल का जवाब अब वन विभाग की जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा।
