राहुल गांधी का सिरदर्द बढ़ाने वाला नया साल! 2026 में इन 11 बड़ी चुनौतियों से निपटना होगा
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के विदेश दौरे से लौटते ही पार्टी के सामने चुनौतियों का अंबार खड़ा हो गया है। साल 2026 कांग्रेस के लिए बेहद अहम होने वाला है, क्योंकि एक के बाद एक राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में पार्टी संगठन, नेतृत्व, गठबंधन और रणनीति—हर मोर्चे पर कांग्रेस को खुद को संभालना होगा। राहुल गांधी के सामने कम से कम 11 बड़े मुद्दे हैं, जिन पर समय रहते फैसला नहीं हुआ तो पार्टी की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
1. शशि थरूर और केरल की गुटबाजी
केरल में कांग्रेस की अंदरूनी कलह सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। शशि थरूर राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे से मिलकर अपना राजनीतिक भविष्य तय करना चाहते हैं। पिछली बार गुटबाजी के कारण कांग्रेस सत्ता से बाहर रही और लेफ्ट ने लगातार दूसरी बार सरकार बना ली। अगर यह विवाद नहीं सुलझा, तो 2026 में भी कांग्रेस की राह मुश्किल होगी।
2. कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद की खींचतान
कर्नाटक कांग्रेस का सबसे बड़ा राज्य है, लेकिन यहां सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच सीएम कुर्सी को लेकर तनाव बना हुआ है। यह मुद्दा जितना लंबा खिंचता जाएगा, पार्टी को उतना ही नुकसान होगा। आलाकमान के लिए संतुलन बनाना आसान नहीं है।
3. जाति कार्ड की रणनीति का फेल होना
राहुल गांधी की जाति आधारित राजनीति की रणनीति बिहार में पूरी तरह फेल हो गई। सवर्ण-ओबीसी-दलित समीकरण साधने की कोशिश के बावजूद कांग्रेस को कोई फायदा नहीं मिला। यह राहुल की रणनीति पर बड़ा सवाल है।
4. महाराष्ट्र में नेतृत्व प्रयोग और हार
महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्य में कांग्रेस ने पुराने नेताओं को किनारे कर हर्षवर्धन सपकाल को प्रदेश अध्यक्ष बनाया, लेकिन नतीजा करारी हार रहा। कभी कांग्रेस का मजबूत गढ़ रहे महाराष्ट्र में पार्टी की साख को गहरा झटका लगा।
5. मनरेगा का मुद्दा
मोदी सरकार ने मनरेगा में बदलाव कर दिए और महात्मा गांधी का नाम तक हटा दिया। कांग्रेस के लिए यह बड़ा राजनीतिक मुद्दा हो सकता था, लेकिन इसे अब तक जन-आंदोलन नहीं बनाया जा सका। राहुल गांधी के लिए इसे फिर से जमीन पर उतारना चुनौती है।
6. वोट चोरी का आरोप
कांग्रेस लगातार वोट चोरी का आरोप लगा रही है। बिहार में राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर यात्रा निकाली, दिल्ली में बड़ी रैली भी हुई, लेकिन महाराष्ट्र निकाय चुनावों में यह मुद्दा जनता से जुड़ता नहीं दिखा। अब इसे राष्ट्रीय मुद्दा बनाना आसान नहीं है।
7. यूपी में सीटों का बंटवारा
उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन कांग्रेस के लिए सिरदर्द बना हुआ है। कांग्रेस 100 से ज्यादा सीटें चाहती है, लेकिन सपा देने को तैयार नहीं। 2024 के बाद कांग्रेस बैकफुट पर है, जिससे उसकी bargaining power कमजोर हुई है।
8. बंगाल चुनाव और ममता फैक्टर
पश्चिम बंगाल में कांग्रेस असमंजस में है। प्रदेश इकाई अकेले चुनाव लड़ना चाहती है, जबकि अधीर रंजन चौधरी लेफ्ट के साथ जाने के पक्ष में हैं। वहीं टीएमसी साफ कर चुकी है कि विधानसभा चुनाव में उसे कांग्रेस की जरूरत नहीं। ममता की शर्तों पर समझौता कांग्रेस के लिए कठिन फैसला होगा।
9. हरियाणा की अंदरूनी लड़ाई
हरियाणा में कांग्रेस लगातार हुड्डा परिवार के इर्द-गिर्द घूमती नजर आती है। बार-बार चुनाव हारने के बावजूद भूपेंद्र हुड्डा का प्रभाव बना हुआ है, जिससे वीरेंद्र सिंह, कुमारी सैलजा और रणदीप सुरजेवाला जैसे नेता नाराज हैं। पार्टी में गुटबाजी खुलकर सामने आ चुकी है।
10. पंजाब में सत्ता वापसी की उलझन
पंजाब में कांग्रेस सत्ता में लौटना चाहती है, लेकिन संगठनात्मक विवाद खत्म नहीं हो रहे। पहले प्रभारी सचिव और प्रदेश अध्यक्ष का विवाद, फिर नवजोत सिद्धू से जुड़ा मामला—इन सबने पार्टी को असहज कर दिया है। सिद्धू की चुप्पी भी कांग्रेस के लिए चिंता का विषय है।
11. असम में कमजोर पकड़
बीजेपी जहां एक चुनाव खत्म होते ही अगले चुनाव की तैयारी में जुट जाती है, वहीं कांग्रेस अब भी अंदरूनी विवादों में उलझी नजर आती है। राहुल गांधी के लिए 2026 सिर्फ चुनावी साल नहीं, बल्कि नेतृत्व की असली परीक्षा है। अगर समय रहते इन 11 चुनौतियों का समाधान नहीं हुआ, तो कांग्रेस के लिए आने वाला साल और भी भारी पड़ सकता है।
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