रिपोर्ट : राहुल भदौरिया : रेजीडेंट एडिटर
■ हाईकोर्ट के निर्देश पर नगर निगम की बड़ी कार्रवाई, भारी पुलिस बल रहा तैनात
लखनऊ। राजधानी लखनऊ के कैसरबाग स्थित सिविल कोर्ट परिसर में शनिवार को अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत नगर निगम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 200 से अधिक अवैध वकीलों के चैंबर और दुकानों को बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के सख्त निर्देशों के बाद की गई, जिसमें कोर्ट परिसर और आसपास के क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कराने के आदेश दिए गए थे।
सुबह करीब 9 बजे के बाद नगर निगम, प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम सिविल कोर्ट परिसर पहुंची। सिविल कोर्ट से निबंधन कार्यालय तक पूरे इलाके में भारी पुलिस बल की मौजूदगी रही। नगर निगम की टीम ने पहले से चिन्हित किए गए अस्थायी और स्थायी अवैध निर्माणों पर जेसीबी मशीनों से कार्रवाई शुरू की। देखते ही देखते कई वर्षों से बने चैंबर और दुकानें मलबे में तब्दील हो गईं।
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, ये अवैध निर्माण नाले और सड़क की भूमि पर किए गए थे, जिससे आम लोगों की आवाजाही प्रभावित हो रही थी। अधिकारियों ने बताया कि 12 मई को ही अवैध निर्माणों पर लाल निशान लगाकर नोटिस जारी किए गए थे और संबंधित लोगों को 16 मई तक स्वयं अतिक्रमण हटाने का समय दिया गया था। समय सीमा समाप्त होने के बाद प्रशासन ने शनिवार को अभियान चलाया।
बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई अनुराधा सिंह द्वारा दाखिल याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के आदेश के बाद की गई। कोर्ट ने प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि सार्वजनिक रास्तों और नालों पर हुए कब्जों को तत्काल हटाया जाए।
कार्रवाई के दौरान किसी प्रकार के विरोध या हंगामे की आशंका को देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस बल और पीएसी जवान तैनात किए गए थे। हालांकि कुछ वकीलों और दुकानदारों ने प्रशासन की कार्रवाई पर नाराजगी जताई। उनका कहना था कि उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया गया और न ही वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई गई।
प्रशासन ने 17 मई की तारीख इसलिए चुनी क्योंकि उस दिन न्यायालय में अवकाश रहता है और आम दिनों की तुलना में भीड़ कम होती है। नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि पूरे क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए आगे भी अभियान जारी रहेगा।



