बस्ती में दहेज की बलि चढ़ी एक और बेटी! शादी के एक साल बाद उजड़ गया घर, 4 महीने का मासूम हुआ अनाथ
उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। जिस बेटी ने सात फेरे लेकर अपने नए जीवन की शुरुआत की थी, उसी घर से उसकी अर्थी उठी। शादी को अभी एक साल भी पूरा नहीं हुआ था और चार महीने का मासूम बेटा अभी ठीक से मां की गोद का प्यार भी नहीं समझ पाया था कि उसकी मां हमेशा के लिए इस दुनिया को छोड़ गई।
मृतका के परिजनों का आरोप है कि दहेज की मांग पूरी न होने पर उसकी बेरहमी से पिटाई की गई और उसे इतना प्रताड़ित किया गया कि आखिरकार इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला बस्ती जिले के नगर थाना क्षेत्र के धोबी टोला का है। मृतका का नाम ज्योति बताया जा रहा है, जो कलवारी थाना क्षेत्र के भेंडवा गांव की रहने वाली थी। परिजनों के अनुसार, ज्योति की शादी 13 मई 2025 को नगर बाजार के धोबी टोला निवासी सोनू कन्नौजिया के साथ हुई थी। शादी के कुछ समय बाद से ही दहेज को लेकर विवाद शुरू हो गया था। परिवार का आरोप है कि ससुराल पक्ष की ओर से पांच लाख रुपये की मांग की जा रही थी और मांग पूरी न होने पर ज्योति को लगातार परेशान किया जाता था।
दहेज के लिए प्रताड़ना का आरोप
मृतका के परिवार का कहना है कि ज्योति के साथ उसके पति, सास और अन्य परिजन अच्छा व्यवहार नहीं करते थे। आरोप है कि उसे बार-बार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था।
परिजनों का दावा है कि 6 जून की शाम दहेज की मांग को लेकर फिर विवाद हुआ और उसके बाद ज्योति के साथ मारपीट की गई।
उन्होंने आरोप लगाया है कि मारपीट के दौरान उसका गला दबाया गया, जिससे वह बेहोश हो गई।
अस्पताल से लेकर गोरखपुर तक चला इलाज
घटना की जानकारी मिलने के बाद मायके वाले मौके पर पहुंचे और ज्योति को इलाज के लिए अस्पताल ले गए। सबसे पहले उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत गंभीर होने पर मेडिकल कॉलेज बस्ती भेजा गया। जब वहां भी हालत में सुधार नहीं हुआ तो उसे मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर कर दिया गया।
कई दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद गुरुवार दोपहर इलाज के दौरान ज्योति ने दम तोड़ दिया। जैसे ही उसकी मौत की खबर गांव पहुंची, परिवार में मातम छा गया।
चार महीने के मासूम से छिन गई मां
इस घटना का सबसे दुखद पहलू यह है कि ज्योति का एक चार महीने का बेटा भी है। जिस बच्चे को अभी मां की गोद और ममता की सबसे ज्यादा जरूरत थी, वह अब मां के साये से वंचित हो गया है। परिवार के लोग बच्चे को देखकर बार-बार भावुक हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस घटना ने सभी को अंदर तक हिला दिया है।
परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप
मृतका के पिता रविंद्र कुमार ने पुलिस को दी गई तहरीर में कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पति सोनू, सास उर्मिला देवी, भतीजा ऋषि और अन्य परिजनों ने मिलकर ज्योति के साथ मारपीट की। परिजनों का आरोप है कि उसके हाथ-पैर बांधे गए, लाठी-डंडों से पीटा गया और उसके पेट पर हमला किया गया। इन आरोपों की जांच पुलिस कर रही है। इस मामले में क्षेत्राधिकारी (सीओ) प्रदीप कुमार त्रिपाठी ने बताया कि विवाहिता के साथ मारपीट की शिकायत मिलने पर पहले ही मुकदमा दर्ज किया गया था।
उन्होंने कहा कि इलाज के दौरान महिला की मौत हो गई है। अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के आधार पर मुकदमे में जरूरी धाराएं बढ़ाई जा रही हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
दहेज प्रथा आज भी बड़ी समस्या
देश में दहेज लेना और देना कानूनन अपराध है, लेकिन इसके बावजूद ऐसी घटनाएं लगातार सामने आती रहती हैं। हर साल कई परिवार दहेज की मांग के कारण टूट जाते हैं और कई बेटियां अपनी जान गंवा देती हैं।
समाज के कई लोग मानते हैं कि जब तक दहेज जैसी बुराई के खिलाफ मिलकर आवाज नहीं उठाई जाएगी, तब तक ऐसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाना मुश्किल होगा।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
जिस परिवार ने अपनी बेटी को खुशी-खुशी विदा किया था, आज वही परिवार उसकी मौत का दुख झेल रहा है। मां-बाप का कहना है कि उन्होंने अपनी बेटी को अच्छे भविष्य के सपने के साथ विदा किया था, लेकिन अब उनके पास सिर्फ उसकी यादें बची हैं। घर में चार महीने के मासूम की मासूमियत और मां की कमी हर किसी की आंखें नम कर रही है।
लोगों में आक्रोश
घटना के बाद इलाके के लोगों में काफी नाराजगी देखी जा रही है। कई लोगों का कहना है कि अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
निष्कर्ष
बस्ती की यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक चेतावनी है। एक बेटी, एक पत्नी और एक मां की जिंदगी खत्म हो गई, जबकि चार महीने का मासूम अपनी मां के प्यार से हमेशा के लिए दूर हो गया। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई स्पष्ट होगी।
लेकिन इतना जरूर है कि दहेज जैसी सामाजिक बुराई के खिलाफ समाज को एकजुट होकर खड़ा होना होगा, ताकि किसी और बेटी का घर इस तरह न उजड़े।




