गाजियाबाद: जिले में गंभीर अपराधों के मामलों में प्रभावी पैरवी के लिए चलाए जा रहे ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत पुलिस को एक मामले में सफलता मिली है। लोनी बॉर्डर थाना क्षेत्र में वर्ष 2024 में दर्ज दुष्कर्म के मामले में अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने दोषी पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
यह फैसला अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, पॉक्सो कोर्ट, गाजियाबाद की अदालत ने सुनाया। पुलिस के अनुसार, मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों और प्रभावी पैरवी के आधार पर अदालत ने आरोपी संदीप पुत्र कुंवरपाल, निवासी लोनी बॉर्डर को दोषी माना।
गाजियाबाद दुष्कर्म केस : 2024 में दर्ज हुआ था मुकदमा
पुलिस के मुताबिक, 24 जनवरी 2024 को लोनी बॉर्डर थाने में एक महिला की शिकायत पर मुकदमा दर्ज किया गया था। शिकायत में नाबालिग पीड़िता के साथ गंभीर अपराध किए जाने का आरोप लगाया गया था। मामला सामने आने के बाद पुलिस ने इसकी जांच शुरू की।
मामले की विवेचना तत्कालीन उपनिरीक्षक सोनू कुमार द्वारा की गई। पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों को एकत्र किया गया और मामले से जुड़े जरूरी दस्तावेज तैयार किए गए। इसके बाद केस को अदालत में विचारण के लिए प्रस्तुत किया गया।

कन्विक्शन सेल ने की लगातार पैरवी
गाजियाबाद पुलिस के अनुसार, पुलिस आयुक्त जे रविंद्र गोड़ के दिशा-निर्देशन में कन्विक्शन सेल न्यायालयों में विचाराधीन गंभीर मामलों में प्रभावी पैरवी के लिए काम कर रहा है। इसका उद्देश्य जांच और अभियोजन के बीच बेहतर समन्वय बनाकर मामलों को मजबूत तरीके से अदालत के सामने रखना है।
इस मामले में भी कन्विक्शन सेल ने अभियोजन पक्ष के साथ लगातार समन्वय किया। पुलिस के मुताबिक, विशेष लोक अभियोजक उत्कर्ष वत्स ने अदालत में मामले की पैरवी की और अभियोजन पक्ष की ओर से उपलब्ध साक्ष्यों एवं दलीलों को न्यायालय के सामने रखा गया।
अदालत ने सुनाई 20 साल की सजा
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रस्तुत साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष की दलीलों पर विचार किया। इसके बाद आरोपी संदीप को संबंधित प्रावधान के तहत दोषी ठहराया गया।
अदालत ने दोषी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा उस पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। फैसले के बाद पुलिस ने इसे ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत प्रभावी पैरवी का परिणाम बताया।
गंभीर मामलों में साक्ष्यों पर जोर
गाजियाबाद पुलिस का कहना है कि गंभीर अपराधों के मामलों में मजबूत साक्ष्य जुटाना और उन्हें सही तरीके से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना बेहद महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से विवेचकों, अभियोजन अधिकारियों और कन्विक्शन सेल के बीच समन्वय बढ़ाया जा रहा है।
पुलिस के अनुसार, किसी भी आपराधिक मामले में सिर्फ गिरफ्तारी तक कार्रवाई सीमित नहीं रहती। जांच पूरी होने के बाद साक्ष्यों के आधार पर चार्जशीट दाखिल करना और अदालत में प्रभावी पैरवी करना भी पुलिस की कार्रवाई का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत जारी है पैरवी
कमिश्नरेट पुलिस के मुताबिक, ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत गंभीर अपराधों में आरोपियों को कानून के मुताबिक सजा दिलाने के लिए लगातार पैरवी की जा रही है। पुलिस का कहना है कि ऐसे मामलों में जांच की गुणवत्ता, साक्ष्यों का संकलन और अभियोजन पक्ष के साथ समन्वय पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
लोनी बॉर्डर थाने के इस मामले में अदालत के फैसले के बाद पुलिस ने कहा कि पीड़ित पक्ष को न्याय दिलाने की दिशा में प्रभावी कानूनी कार्रवाई की गई। पुलिस के अनुसार, आगे भी गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों में न्यायालय के समक्ष मजबूत पैरवी जारी रहेगी।



