राजनांदगांव/डोंगरगांव। स्कूल को बच्चों के लिए सुरक्षित जगह माना जाता है। शिक्षक को सिर्फ पढ़ाने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि बच्चों का मार्गदर्शक और भरोसेमंद संरक्षक माना जाता है। ऐसे में जब किसी शिक्षक पर ही नाबालिग छात्रा के साथ छेड़छाड़ जैसे गंभीर आरोप लगते हैं, तो मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।
राजनांदगांव जिले के डोंगरगांव थाना क्षेत्र के कुमर्दा स्थित स्कूल से ऐसा ही एक गंभीर मामला सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, 24 सितंबर 2026 को एक नाबालिग बालिका के पिता ने थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में शिक्षक मनोज कुमार बंजारे पर नाबालिग छात्रा के साथ छेड़छाड़ किए जाने का आरोप लगाया गया। पुलिस ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए अपराध दर्ज कर जांच शुरू की।
राजनांदगांव शिक्षक छात्रा छेड़छाड़ : शिकायत मिलते ही पुलिस ने शुरू की कार्रवाई
पुलिस के अनुसार, इस मामले में अपराध क्रमांक 299/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 75(2) और पॉक्सो एक्ट की धारा 12 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया। जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी शिक्षक की पहचान मनोज कुमार बंजारे के रूप में की और उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की। इसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। रिपोर्टों के अनुसार शिकायत मिलने के करीब 12 घंटे के भीतर पुलिस ने गिरफ्तारी की कार्रवाई की।
मामले में पुलिस ने नाबालिग के बयान सहित अन्य तथ्यों की जांच शुरू की है। चूंकि मामला पॉक्सो एक्ट से जुड़ा है, इसलिए जांच के दौरान बच्ची की पहचान और उसकी निजता की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है।
शिक्षक पर लगे आरोपों ने खड़े किए कई सवाल
शिक्षक और छात्र के बीच का रिश्ता विश्वास पर आधारित होता है। माता-पिता अपने बच्चों को स्कूल भेजते समय यह उम्मीद करते हैं कि वहां उन्हें सुरक्षित माहौल मिलेगा। इसलिए किसी शिक्षक पर छात्रा के साथ अनुचित व्यवहार का आरोप सामने आने पर स्वाभाविक रूप से स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठते हैं।
हालांकि, यह भी जरूरी है कि किसी आरोपी के खिलाफ लगे आरोपों को न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने से पहले अंतिम सत्य के रूप में पेश न किया जाए। इस मामले में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जांच और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई है। अंतिम तथ्य अदालत में सामने आने वाली प्रक्रिया और साक्ष्यों पर निर्भर करेंगे।
राजनांदगांव में पहले भी सामने आए हैं ऐसे मामले
राजनांदगांव जिले में सितंबर 2026 के दौरान स्कूलों से जुड़े नाबालिग छात्राओं के खिलाफ कथित अनुचित व्यवहार के अन्य मामले भी रिपोर्ट हुए हैं। गैंदाटोला के एक सरकारी स्कूल में शिक्षक पर छात्राओं के साथ कथित छेड़छाड़ और अनुचित व्यवहार के आरोप में POCSO एक्ट के तहत कार्रवाई की गई थी। इस मामले में परीक्षा में पास कराने के नाम पर अनुचित प्रस्ताव देने के आरोप भी रिपोर्ट हुए थे।
एक अन्य मामले में स्कूल से घर लौट रही नाबालिग बालिकाओं के साथ कथित छेड़छाड़ की शिकायत पर सुरगी पुलिस चौकी ने कार्रवाई की थी।
इन घटनाओं को किसी पूरे शिक्षक समुदाय से जोड़ना उचित नहीं होगा। अधिकांश शिक्षक बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाते हैं। लेकिन जहां भी बच्चों के खिलाफ अपराध या अनुचित व्यवहार की शिकायत सामने आती है, वहां शिकायत की गंभीरता से जांच और समय पर कार्रवाई जरूरी है।
स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत
ऐसे मामलों के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि स्कूलों में बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण कैसे सुनिश्चित किया जाए। स्कूल प्रशासन को शिकायतों को गंभीरता से लेने, बच्चों को अपनी बात कहने के लिए सुरक्षित माध्यम उपलब्ध कराने और अभिभावकों के साथ नियमित संवाद बनाए रखने पर ध्यान देना चाहिए।
बच्चों को भी यह समझाया जाना जरूरी है कि यदि कोई बड़ा व्यक्ति उनके साथ ऐसा व्यवहार करता है जिससे वे असहज महसूस करते हैं, तो वे भरोसेमंद अभिभावक, शिक्षक या संबंधित अधिकारी को इसकी जानकारी दे सकते हैं। किसी शिकायत को दबाने के बजाय समय पर सामने लाना बच्चों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
कार्रवाई के साथ जवाबदेही भी जरूरी
डोंगरगांव के इस मामले में पुलिस की त्वरित कार्रवाई के बाद अब जांच की प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। पुलिस को उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच करनी होगी और मामले के सभी तथ्यों को सामने लाना होगा। वहीं स्कूल और शिक्षा विभाग की ओर से भी यह देखना जरूरी होगा कि बच्चों की सुरक्षा के लिए मौजूद व्यवस्थाएं कितनी प्रभावी हैं।
एक शिक्षक पर लगे आरोप पूरे शिक्षक समाज की तस्वीर नहीं हैं, लेकिन ऐसे मामले यह जरूर याद दिलाते हैं कि बच्चों की सुरक्षा में किसी भी स्तर पर लापरवाही की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। स्कूल सिर्फ पढ़ाई की जगह नहीं, बल्कि बच्चों के सुरक्षित भविष्य की नींव रखने वाली जगह है। इसलिए वहां विश्वास, सम्मान और सुरक्षा का माहौल बनाए रखना स्कूल प्रशासन, शिक्षा विभाग, अभिभावकों और समाज—सभी की साझा जिम्मेदारी है।



