कानपुर। कानपुर में एक अस्पताल पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगने के बाद मामला इतना बढ़ गया कि बड़ी संख्या में आईटीबीपी (ITBP) के जवान पुलिस कमिश्नरेट कार्यालय पहुंच गए। आरोप है कि गलत इलाज की वजह से एक महिला का हाथ काटना पड़ा जो कि ITBP के जवान की मां है, ऐसे में अपनी माँ का कटा हुआ हाँथ आइसबॉक्स में लेकर लगभग 3 दिन तक ITBP जवान पुलिस से कार्यवाही की मांग करता था पर उसकी फरियाद न सुनी गई, इंसाफ की जगह जवान को उस वक़्त मायूसी हुई जब लापरवाही करने वाले अस्पताल को CMO द्वारा मामले में क्लीनचिट दे दी गयी जिसके बाद जवान के साथ साथ उसकी बटालियन में भी आक्रोश फैल गया, कार्यवाही में लापरवाही और जांच रिपोर्ट से असंतुष्ट जवानों ने पुलिस कमिश्नर कार्यालय को घेर लिया, जहां बड़ी संख्या में ITBP जवान हथियारों के साथ पहुँचे और ऐसे पोजीशन ले ली जैसे उन्होंने कानपुर पुलिस कमिश्नर ऑफिस को बंधक बना लिया और कार्यवाही की मांग पर अड़ गए, कुछ ही देर में कमिश्नर कार्यालय में ITBP के जवानों द्वारा घेराव की खबर सोशल मीडिया पर फैल गयी, सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कमिश्नर ऑफिस में कानपुर कमिश्नर रघुवीर लाल, जॉइंट कमिश्नर विपीन ताडा व ITBP की ओर से कार्यालय में काफी समय तक वार्ता हुई जिसके बाद ITBP के अधिकारियों ने मामले पर तत्काल कार्रवाई की मांग की। मामला कुछ समय के लिए बेहद संवेदनशील और तनावपूर्ण स्थिति में पहुंच गया, जहां करीब एक घंटे तक अधिकारियों और आईटीबीपी जवानों के बीच बातचीत चलती रही। हालांकि पुलिस कमिश्नरेट कार्यालय के घेराव की बात को कानपुर कमिश्नर रघुबीर लाल, समेत ITBP के अधिकारियों ने नकारते हुए बताया कि वो मामले पर बात करने आये थे, घेराव जैसी कोई बात नही है ।
क्या था पूरा मामला, शुरवात से समझे
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, मूल रूप से फतेहपुर के हथगाम क्षेत्र के ग्राम आलीमऊ निवासी विकास सिंह आईटीबीपी में कांस्टेबल पद पर तैनात हैं और वर्तमान में उनकी पोस्टिंग महाराजपुर स्थित आईटीबीपी कैंप में है। विकास सिंह के अनुसार उनकी 56 वर्षीय मां निर्मला देवी को सांस लेने में परेशानी, कमजोरी और कब्ज की शिकायत थी। शुरुआत में उन्हें आईटीबीपी के अस्पताल में दिखाया गया, लेकिन हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया।
इसके बाद 13 मई की शाम को परिवार द्वारा उन्हें टाटमिल चौराहा स्थित कृष्णा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। विकास सिंह का आरोप है कि उनकी मां को पेट से संबंधित समस्या थी, लेकिन अस्पताल में इलाज के दौरान गलत इंजेक्शन लगाया गया। आरोप के अनुसार इंजेक्शन लगने के कुछ समय बाद महिला के हाथ में असामान्य बदलाव शुरू हो गए। हाथ का रंग बदलने लगा और सूजन तेजी से बढ़ने लगी। परिवार ने जब महिला की हालत बिगड़ती देखी तो उन्हें तत्काल दूसरे अस्पताल में भर्ती कराया गया। महिला को बिठूर रोड स्थित पारस हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने स्थिति को गंभीर बताया। काफी प्रयास के बावजूद संक्रमण को नियंत्रित नहीं किया जा सका। डॉक्टरों के मुताबिक हाथ में संक्रमण काफी फैल चुका था, जिसके चलते 17 मई को महिला का हाथ काटना पड़ा।
इस घटना से आहत विकास सिंह बीते दिनों अपनी मां का कटा हुआ हाथ लेकर पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचे थे। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की थी। पुलिस कमिश्नर ने मामले को जांच के लिए सीएमओ कार्यालय भेज दिया था, लेकिन आरोप है कि गठित जांच समिति की रिपोर्ट में कोई स्पष्ट निष्कर्ष सामने नहीं आया।
इसी से नाराज होकर विकास सिंह अपने कैंप के 50 से अधिक जवानों और अधिकारियों के साथ पुलिस कमिश्नरेट पहुंच गए। सभी ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर बुलाया गया। करीब एक घंटे तक चली बातचीत के बाद सीएमओ ने मामले की दोबारा जांच कराने का आश्वासन दिया। विकास सिंह ने भावुक होते हुए कहा कि “जिन हाथों ने बचपन से मुझे पाला-पोसा, आज उन्हीं हाथों को मेरे सामने काटना पड़ा। मैं देश की सेवा कर रहा हूं, लेकिन अपनी मां को इंसाफ नहीं दिला पा रहा हूं।”
वहीं मामले पर एडिशनल पुलिस कमिश्नर विपिन ताडा ने बताया कि आईटीबीपी के अधिकारियों और जवानों से बातचीत की गई है। पूरे मामले की पुनः गंभीरता से जांच कराई जा रही है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।



