उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शीतकालीन सत्र से पहले कोडीन तस्करी मामले को लेकर समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जांच में आरोपियों के सपा से संबंध सामने आए हैं और जांच पूरी होने पर सच्चाई उजागर हो जाएगी। सीएम योगी ने कहा, “दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।”

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि कोडीन फॉस्फेट एनडीपीएस अधिनियम के अंतर्गत आने वाली औषधि है, जिसका दुरुपयोग नशीले पदार्थ के रूप में किया जा रहा था। यूपी पुलिस, एसटीएफ और एफएसडीए द्वारा कार्रवाई जारी है और पूरे मामले की निगरानी राज्य-स्तरीय एसआईटी कर रही है। उन्होंने बताया कि शीतकालीन सत्र 24 दिसंबर तक चलेगा, जिसमें विकास से जुड़े मुद्दों, अनुपूरक मांगों और ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने पर चर्चा की जाएगी। सरकार सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है।
ये था मामला और फरार शुभम जायसवाल ही था मास्टर माइंड
उत्तर प्रदेश में कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध तस्करी और करोड़ों के हवाला लेन-देन से जुड़े रैकेट की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की थी। पिछले शुक्रवार को ईडी ने यूपी, झारखंड और गुजरात में 25 ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई 30 से अधिक एफआईआर पर आधारित रही। मामले में लगभग 1,000 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है और मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल दुबई भाग चुका है। कार्रवाई लखनऊ, वाराणसी, जौनपुर और सहारनपुर के अलावा रांची और अहमदाबाद में हुई। उस समय बड़ा बना जब यूपी सरकार ने राज्य में कोडीन आधारित कफ सिरप के दुरुपयोग, अवैध निर्माण और तस्करी के कई मामलों पर संज्ञान लिया था। एसटीएफ द्वारा की गई गिरफ्तारी में कई का नाम बाहुबली नेता धनंजय सिंह के साथ जुड़ा होना बताया गया। इसके बाद से प्रदेश की सियासत में भूचाल आ गया था। सत्ता और विपक्ष ने एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाए और मामला सड़क से लेकर संसद तक उठाया गया।

पिछले सप्ताह ईडी की छापेमारी में शुभम जायसवाल के घर से मिला जखीरा
पिछले सप्ताह ईडी द्वारा रांची में शुभम जायसवाल की फर्म शैली ट्रेडर्स के ठिकानों पर छापों के दौरान 189 फर्जी फर्मों का ब्योरा मिला है, जिनके जरिए 450 करोड़ रुपये का टर्नओवर दर्शाया गया था। यह लेन-देन कफ सिरप की तस्करी को छिपाने के लिए दर्शाया गया था। वहीं शुभम जायसवाल के वाराणसी स्थित घर से तमाम लग्जरी सामान बरामद किया गया है, जिसमें प्रादा और गुच्ची के डिजाइनर बैग और राडो और ऑडेमर्स पिगुएट जैसे ब्रांड की हाई-एंड लग्जरी घड़ियां शामिल हैं। इनकी कीमत 1.5 करोड़ रुपये से ज्यादा है।
सहारनपुर के विभोर राणा और विशाल सिंह ने की अकूत संपति अर्जित
जांच में सामने आया है कि शुभम जायसवाल, बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह, सहारनपुर के विभोर राणा व विशाल सिंह ने अपने आलीशान घरों में करोड़ों रुपये खर्च किए। अधिकारियों को शक है कि कफ सिरप की तस्करी से होने वाली बेशुमार काली कमाई को खर्च किया गया। सभी के घरों में इंटीरियर का महंगा काम कराया गया है। ईडी के अधिकारी सरकार से अधिकृत वैल्यूअर से घर और इंटीरियर की कीमत का पता लगा रहे हैं ताकि आगे उन्हें जब्त किया जा सके।
बर्खास्त सिपाही आलोक प्रताप सिंह ने महल बनाने में किए 5 करोड़ खर्च
बर्खास्त सिपाही आलोक प्रताप सिंह के घर की जांच में पता चला कि महल जैसी संपत्ति बनाने पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए थे। शुरुआती जांच में अकेले कंस्ट्रक्शन की लागत लगभग 5 करोड़ रुपये आंकी गई है, जिसमें ज़मीन की कीमत शामिल नहीं है। आलोक का घर राजधानी के पॉश इलाके में होने की वजह से जमीन की कीमत का अलग से पता लगाया जाएगा। वहीं मेसर्स आर्पिक फार्मास्यूटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड ने कोडीन-बेस्ड कफ सिरप के गैर-कानूनी व्यापार और डायवर्जन में कंपनी की संलिप्तता का खुलासा किया। कंपनी के ठिकानों पर छापे में कई करोड़ रुपये के बिना हिसाब के लेन-देन का पता चला है। यह भी सामने आया है कि आर्पिक फार्मा अपनी सहयोगी कंपनी मेसर्स इधिका लाइफ साइंसेज के साथ कफ सिरप की तस्करी कर रही थी



