रिपोर्ट : ज्ञानेंद्र शुक्ला – कानपुर संवाददाता
कानपुर शहर में अब दंगों और बवाल की किसी भी घटना पर तुरंत और प्रभावी कार्रवाई हो सके, इसके लिए कानपुर पुलिस कमिश्नरेट ने एक नई स्पेशल यूनिट का गठन किया है। इस यूनिट को दिया गया है आकर्षक और भयावह नाम — ‘ब्लैक हॉक’। काले सुरक्षा कवच में लिपटे ये 60 जांबाज कमांडो अब शहर की संवेदनशील गलियों, बाजारों और इलाकों में उतर चुके हैं।
यह दस्ता औद्योगिक नगरी कानपुर की कानून व्यवस्था को और मजबूत बनाने का एक बड़ा कदम है। जहां छोटी-मोटी घटनाएं भी कभी-कभी बड़े दंगों का रूप ले लेती हैं, वहां ‘ब्लैक हॉक’ की त्वरित रिस्पॉन्स टीम (QRT) किसी भी अप्रिय स्थिति को काबू में लाने के लिए तैयार रहेगी।
‘ब्लैक हॉक’ विंग की प्रमुख खासियतें:
इस विशेष दस्ते में कुल 60 सबसे फिट, सक्रिय और ऊर्जावान पुलिसकर्मियों को शामिल किया गया है। इन जवानों को भीड़ नियंत्रण, छापामार कार्रवाई और दंगा प्रबंधन की खास ट्रेनिंग दी जा रही है। इनके पास आधुनिक ब्लैक बॉडी प्रोटेक्टर उपलब्ध है, जो पथराव, हमले या अन्य खतरे से इनकी सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। काला रंग इनकी छवि को और भी दहशत भरा बनाता है और रात के समय या तंग गलियों में बेहतर तरीके से छिपने में भी मदद करता है।
पुलिस कमिश्नरेट ने इन कमांडोज को मौके पर तुरंत फैसला लेने की पर्याप्त शक्तियां भी प्रदान की हैं। यदि कहीं दंगा भड़कता है, आगजनी होती है या तोड़फोड़ की कोशिश की जाती है, तो ‘ब्लैक हॉक’ टीम निम्नलिखित कदम उठा सकती है: तत्काल लाठीचार्ज का आदेश, रबड़ बुलेट (रबर गोलियों) का इस्तेमाल : अश्रु गैस (टीयर गैस) के गोलों का प्रभावी प्रयोग ये सभी कार्रवाई परिस्थिति के अनुसार और न्यूनतम बल के सिद्धांत के तहत की जाएगी, लेकिन उपद्रवियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर (L&O) डॉ. विपिन ताडा का बयान:
डॉ. विपिन ताडा ने इस नई पहल पर कहा, “हमने शहर में त्वरित कार्यवाही और तोड़फोड़ जैसी घटनाओं पर तुरंत नियंत्रण पाने के लिए ‘ब्लैक हॉक’ विंग का गठन किया है। इनका मुख्य मकसद किसी भी अप्रिय सूचना मिलते ही कम से कम समय में मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभालना है। यह यूनिट स्थानीय स्तर पर PAC की तरह काम करेगी, लेकिन ज्यादा चुस्त और प्रभावी होगी।”
ट्रायल मोड में सक्रिय, रोजाना रूट मार्च:
फिलहाल ‘ब्लैक हॉक’ दस्ता ट्रायल मोड में काम कर रहा है। रोजाना शहर के अलग-अलग संवेदनशील इलाकों और तंग गलियों में स्थानीय थाना पुलिस के साथ मिलकर ये जवान रूट मार्च निकाल रहे हैं। इस मार्च का उद्देश्य सिर्फ अपनी ताकत का प्रदर्शन करना ही नहीं है, बल्कि अपराधियों के मन में खौफ पैदा करना और आम जनता के मन में सुरक्षा का भरोसा जगाना भी है।
कानपुर जैसे बड़े और संवेदनशील शहर में ऐसी स्पेशल यूनिट का गठन बहुत ही जरूरी और समयोचित कदम माना जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि ‘ब्लैक हॉक’ के सक्रिय होने से दंगा या बवाल की घटनाओं में काफी कमी आएगी। कमांडोज की ट्रेनिंग लगातार जारी है और भविष्य में इस दस्ते की क्षमता को और बढ़ाया जाएगा। यह पहल उत्तर प्रदेश पुलिस की आधुनिक और सख्त सोच को साफ दर्शाती है। अब अगर कोई कानून को हाथ में लेने या शहर की शांति भंग करने की कोशिश करेगा, तो ‘ब्लैक हॉक’ की पैनी नजर और त्वरित कार्रवाई उसे रोकने के लिए तैयार रहेगी।

ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर (L&O) डॉ. विपिन ताडा का बयान:

