श्रीलंका के दांबुला में खेली जा रही ट्राई नेशन सीरीज में भारत-ए और अफगानिस्तान-ए के बीच मुकाबला खेला गया। इस मैच में एक बार फिर सभी की नजरें 15 साल के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी पर थीं। क्रिकेट प्रेमियों को उम्मीद थी कि इस बार वैभव बड़ी पारी खेलकर अपनी प्रतिभा का परिचय देंगे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। वैभव ने अच्छी शुरुआत जरूर की, लेकिन उसे बड़ी पारी में नहीं बदल पाए और 38 रन बनाकर आउट हो गए।
यह लगातार चौथा मैच है जब वैभव सूर्यवंशी कोई बड़ी पारी खेलने में सफल नहीं रहे हैं। हालांकि उनकी बल्लेबाजी में आत्मविश्वास दिखाई दिया, लेकिन एक बार फिर वह अर्धशतक से पहले ही पवेलियन लौट गए।

तीन जीवनदान के बाद भी नहीं बना सके बड़ी पारी
मैच में वैभव सूर्यवंशी को किस्मत का भी पूरा साथ मिला। अफगानिस्तान-ए के खिलाड़ियों ने उनके तीन कैच छोड़ दिए। शुरुआत में ही उन्हें पहला जीवनदान मिला। इस दौरान कैच को लेकर थर्ड अंपायर का फैसला भी विवादों में रहा। कई क्रिकेट विशेषज्ञों और कमेंटेटर्स ने इसे गलत फैसला बताया।
इसके बाद तीसरे ओवर में उन्हें दूसरा जीवनदान मिला। फरिदून दाऊदजई की गेंद पर वैभव ने हुक शॉट खेलने की कोशिश की, लेकिन गेंद बल्ले के ऊपरी हिस्से से लग गई। शॉर्ट फाइन लेग पर मौजूद फील्डर ने शानदार प्रयास किया, लेकिन कैच पकड़ नहीं सके।
तीन-तीन मौके मिलने के बाद उम्मीद थी कि वैभव बड़ा स्कोर बनाएंगे, लेकिन वह इस अवसर का पूरा फायदा नहीं उठा पाए।
28 गेंदों में बनाए 38 रन
वैभव सूर्यवंशी ने अपनी पारी में 28 गेंदों का सामना किया और 38 रन बनाए। इस दौरान उन्होंने 4 शानदार चौके और 2 बेहतरीन छक्के लगाए। उनकी बल्लेबाजी में आक्रामकता साफ दिखाई दी और उन्होंने शुरुआत से ही तेजी से रन बनाने की कोशिश की।
हालांकि जब वह अच्छी लय में नजर आ रहे थे, तभी अफगानिस्तान-ए के गेंदबाज फरिदून दाऊदजई ने उन्हें अपना शिकार बना लिया। आठवें ओवर की आखिरी गेंद पर वैभव ने पुल शॉट खेलने की कोशिश की, लेकिन गेंद सीधे खालिद तनिवाल के हाथों में चली गई। इस तरह उनकी पारी का अंत हुआ।
फरिदून ने लिया बदला
दिलचस्प बात यह रही कि मैच के दौरान फरिदून दाऊदजई की गेंदों पर ही वैभव को जीवनदान मिला था। लेकिन आखिरकार वही गेंदबाज उन्हें आउट करने में सफल रहा।
फरिदून ने शॉर्ट गेंद फेंकी, जिस पर वैभव ने बड़ा शॉट लगाने की कोशिश की। गेंद बल्ले के बीच में नहीं आई और आसान कैच के रूप में फील्डर के हाथों में पहुंच गई। इस विकेट के साथ भारत-ए की शानदार ओपनिंग साझेदारी भी टूट गई।
ट्राई सीरीज में अब तक फीका रहा प्रदर्शन
वैभव सूर्यवंशी को भारतीय क्रिकेट का भविष्य माना जा रहा है। इतनी कम उम्र में उन्होंने अपनी बल्लेबाजी से सभी को प्रभावित किया है, लेकिन इस ट्राई सीरीज में उनका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है।
इस मैच से पहले खेले गए तीन मुकाबलों में भी वह कोई बड़ी पारी नहीं खेल पाए थे। पिछले मैच में तो वह सिर्फ 21 रन बनाकर आउट हो गए थे। पूरे टूर्नामेंट में अब तक उनके बल्ले से एक भी अर्धशतक नहीं निकला है।
क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि वैभव के पास प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन उन्हें अपनी शुरुआत को बड़े स्कोर में बदलने की जरूरत है। युवा खिलाड़ी होने के कारण उनसे सीखने और आगे बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है।
भारत-ए की तेज शुरुआत
वैभव के आउट होने के बावजूद भारत-ए की शुरुआत शानदार रही। टीम ने शुरुआती ओवरों में तेजी से रन बनाए और अफगानिस्तान-ए के गेंदबाजों पर दबाव बनाए रखा।
10 ओवर के बाद भारत-ए का स्कोर 98 रन पर 1 विकेट था। उस समय प्रियांश आर्या शानदार बल्लेबाजी कर रहे थे और 48 रन बनाकर क्रीज पर मौजूद थे। वहीं कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ भी उनका साथ निभा रहे थे।
भारत-ए के बल्लेबाज शुरुआत से ही आक्रामक नजर आए और उन्होंने रन गति को लगातार ऊंचा बनाए रखा।

गायकवाड़ पर बड़ी जिम्मेदारी
इस ट्राई सीरीज में ऋतुराज गायकवाड़ भारत-ए के सबसे सफल बल्लेबाज रहे हैं। उन्होंने तीन मैचों में 204 रन बनाए हैं, जिसमें एक शतक और एक अर्धशतक शामिल है।
सीरीज में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों की सूची में भी गायकवाड़ शीर्ष पर हैं। ऐसे में इस मुकाबले में भी उनसे बड़ी पारी की उम्मीद की जा रही थी।
कप्तान तिलक वर्मा को भी भरोसा था कि टीम के अनुभवी बल्लेबाज एक बड़ा स्कोर खड़ा करने में मदद करेंगे।
अफगानिस्तान-ए ने जीता था टॉस
मैच में अफगानिस्तान-ए के कप्तान इमरान मीर ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। उनका मानना था कि दांबुला की परिस्थितियों में लक्ष्य का पीछा करना आसान रहेगा।
टॉस के दौरान इमरान मीर ने कहा कि 260 से 270 रन का स्कोर इस मैदान पर चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। वहीं भारत-ए के कप्तान तिलक वर्मा ने बताया कि वह भी पहले गेंदबाजी करना चाहते थे।
युवा वैभव पर बनी रहेंगी नजरें
भले ही वैभव सूर्यवंशी इस मैच में बड़ी पारी नहीं खेल पाए, लेकिन उनकी प्रतिभा पर किसी को संदेह नहीं है। मात्र 15 साल की उम्र में जिस तरह उन्होंने घरेलू और जूनियर क्रिकेट में अपनी पहचान बनाई है, वह बेहद खास है।
क्रिकेट प्रशंसकों को उम्मीद है कि आने वाले मुकाबलों में वह अपनी गलतियों से सीखेंगे और एक बड़ी पारी खेलकर आलोचकों को जवाब देंगे। फिलहाल ट्राई सीरीज में उनका इंतजार जारी है और सभी को उम्मीद है कि अगली बार उनके बल्ले से बड़ी पारी देखने को मिलेगी।




