रिपोर्ट @ जुहैब अहमद जैबी – संवाददाता
कानपुर : संघर्ष और सफलता की एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जहां एक बेटी ने कठिन हालात में भी अपने हौसले को टूटने नहीं दिया। जवाहर नगर की रहने वाली प्रगति शुक्ला ने हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा में 97.4 प्रतिशत अंक हासिल कर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे इलाके का नाम रोशन कर दिया है।
प्रगति सर पदमपत सिंघानिया एजुकेशन सेंटर की छात्रा हैं। पिछले एक साल से उनकी मां शालिनी शुक्ला रीढ़ की गंभीर बीमारी से जूझ रही हैं, जिसके चलते वे सामान्य रूप से चल-फिर भी नहीं पा रही थीं। ऐसे में घर की जिम्मेदारियां अचानक बढ़ गईं। लेकिन प्रगति ने हालात से घबराने के बजाय उन्हें स्वीकार किया और मजबूती से सामना किया।
सुबह जल्दी उठकर घर के काम निपटाना, मां की देखभाल करना, छोटी बहन का ख्याल रखना और फिर पढ़ाई के लिए समय निकालना—यह सब प्रगति की रोजमर्रा की दिनचर्या बन गया था। दिनभर जिम्मेदारियों में व्यस्त रहने के बाद वह देर रात तक पढ़ाई करती थी, ताकि अपने लक्ष्य से पीछे न रह जाए, बोर्ड परीक्षा के दौरान भी प्रगति ने संतुलन बनाए रखा। उसने घर की जिम्मेदारियों को निभाते हुए बिना किसी दबाव के परीक्षा दी। जब रिजल्ट घोषित हुआ और 97.4% अंक सामने आए, तो पूरे परिवार में खुशी का माहौल बन गया। माता-पिता की आंखों में गर्व और खुशी साफ झलक रही थी।
प्रगति के पिता मनीष शुक्ला, जो एक निजी नौकरी करते हैं, ने बताया कि उनकी बेटी ने हर परिस्थिति में परिवार का साथ दिया है। उन्होंने कहा कि बेटियों ने कभी उन्हें बेटों की कमी महसूस नहीं होने दी। वहीं, मां शालिनी शुक्ला ने भी अपनी बेटी की मेहनत और लगन की सराहना की।
प्रगति अब आगे इंटरमीडिएट की पढ़ाई जारी रखते हुए डॉक्टर या इंजीनियर बनने का सपना देख रही है। स्कूल प्रबंधन ने भी उसकी उपलब्धि को सराहा और उसे अन्य छात्रों के लिए प्रेरणा बताया। प्रगति की यह कहानी सिर्फ एक छात्रा की सफलता नहीं, बल्कि उन सभी बेटियों की ताकत का प्रतीक है जो मुश्किल परिस्थितियों में भी अपने सपनों को जिंदा रखती हैं।



