कानपुर। उत्तर प्रदेश में कानपुर पुलिस ने साइबर अपराधियों के खिलाफ एक ऐसा फिल्मी स्टाइल का अभियान चलाया है, जो देखने वालों को किसी एक्शन थ्रिलर की याद दिला रहा है। रेउना इलाके के एक छोटे से गांव में चल रहे बड़े साइबर ठगी नेटवर्क को पुलिस ने पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। इस ऑपरेशन को ‘ऑपरेशन जामताड़ा’ नाम दिया रेकी, पूरे गांव की घेराबंदी और भारी पुलिस बल का इस्तेमाल किया गया। नतीजा यह रहा कि 19 शातिर साइबर ठगों को गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि रेउना क्षेत्र का यह गांव पूरी तरह साइबर ठगी का अड्डा बन चुका है। यहां के युवा और कुछ परिवार जामताड़ा (झारखंड) शैली में काम कर रहे थे। अपराधी फर्जी कॉल्स के जरिए लोगों को सरकारी योजनाओं का लालच देते थे। पीएम किसान सम्मान निधि, आयुष्मान भारत, उज्ज्वला गैस योजना जैसी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर वे मासूम नागरिकों का व्यक्तिगत डेटा, बैंक खाता नंबर और OTP हासिल कर लेते थे। इसके बाद उनके खातों से सीधे पैसे ट्रांसफर कर लाखों-करोड़ों रुपये की ठगी कर ली जाती थी। इस गिरोह ने न सिर्फ कानपुर और आसपास के जिलों बल्कि अन्य राज्यों के सैकड़ों लोगों को अपना शिकार बनाया था।
पुलिस ने किसी भी आरोपी को भागने का मौका न देने के लिए अत्याधुनिक रणनीति अपनाई। सबसे पहले ड्रोन कैमरों से गांव की पूरी रेकी की गई। आसमान से हर गली, हर घर और हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखी गई। जब खुफिया जानकारी और प्लानिंग पूरी तरह मजबूत हो गई, तब सैकड़ों पुलिसकर्मियों ने पूरे गांव को चारों तरफ से घेर लिया। अपराधियों को सरेंडर करने की चेतावनी दी गई। इसके बाद सर्च ऑपरेशन शुरू हुआ और 19 ठगों को रंगे हाथों दबोच लिया गया।
गिरफ्तार आरोपियों में ज्यादातर स्थानीय युवा शामिल हैं, जबकि कुछ अन्य राज्यों से जुड़े हुए भी पाए गए। इनके पास से भारी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई है। इसमें दर्जनों मोबाइल फोन, सिम कार्ड, म्यूल अकाउंट्स की पूरी डिटेल, फर्जी आधार कार्ड, वोटर आईडी, लैपटॉप, टैबलेट और अन्य हाईटेक गैजेट्स शामिल हैं। ये सभी सामान ठगी के काम में इस्तेमाल हो रहे थे। पुलिस का अनुमान है कि यह नेटवर्क सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका अंतर्राज्यीय कनेक्शन है और बड़े-बड़े साइबर माफिया से भी इसके तार जुड़े हो सकते हैं।
कानपुर पुलिस के एडीसीपी क्राइम सुमित रामटेके ने मीडिया को बताया कि सभी गिरफ्तार आरोपियों से कड़ी पूछताछ चल रही है। शुरुआती जांच में खुलासा हुआ है कि ठग फर्जी सरकारी अधिकारी बनकर फोन करते थे। वे पीड़ितों को डराते धमकाते और जल्दी लाभ दिलाने का वादा करके उनके बैंक डिटेल्स हासिल कर लेते थे। अब तक सैकड़ों शिकायतें इस गिरोह से जुड़ी हुई हैं। पुलिस को उम्मीद है कि आगे की पूछताछ में और बड़े खुलासे होंगे, जिसमें कुछ और नाम और बड़े ठगी नेटवर्क सामने आ सकते हैं।
यह कार्रवाई कानपुर पुलिस की साइबर क्राइम ब्रांच की बेहतरीन खुफिया जानकारी और आधुनिक तकनीक के सही इस्तेमाल का नतीजा है। ड्रोन के जरिए अपराधियों की हर हरकत पर नजर रखकर पुलिस ने साबित कर दिया कि आज के हाईटेक अपराधों से निपटने के लिए पुलिस भी पूरी तरह तैयार और अपडेटेड है। इस ऑपरेशन से स्थानीय लोगों में राहत की लहर दौड़ गई है। कई पीड़ित अब उम्मीद जता रहे हैं कि उनकी ठगी गई रकम का कुछ हिस्सा वापस मिल सकेगा।
कानपुर पुलिस के इस साहसिक कदम ने पूरे उत्तर प्रदेश में सुर्खियां बटोरी हैं। यह सिर्फ एक गिरोह का खात्मा नहीं है, बल्कि उन सभी संभावित अपराधियों के लिए सख्त चेतावनी है जो तकनीक का गलत इस्तेमाल कर आम जनता को लूट रहे हैं। कानून के हाथ अब पहले से कहीं ज्यादा लंबे और मजबूत हो चुके हैं। पुलिस ने आगे भी ऐसे गांवों पर नजर रखने और साइबर जागरूकता अभियान चलाने का ऐलान किया है, ताकि आम नागरिक सरकारी योजनाओं के नाम पर होने वाली ठगी से बच सकें। कुल मिलाकर, कानपुर पुलिस का यह ‘ऑपरेशन जामताड़ा’ साइबर क्राइम के खिलाफ लड़ाई में एक मिसाल बन गया है।
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